यह ख़बर 04 अप्रैल, 2014 को प्रकाशित हुई थी

मरुस्थल में प्यास से जूझते इंसान की कहानी है 'जल'

मुंबई:

फिल्म 'जल' में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं, पूरब कोहली, कीर्ति कुलकर्णी, तनिष्ठा चटर्जी, मुकुल देव, रवि गोसैन और यशपाल शर्मा।

'जल' कहानी है, बक्का की, जिसे मरुस्थल के लोग जल का देवता मानते हैं और जो सिर्फ मन की शक्ति से मरुस्थल में जल ढूंढ निकालता है।

बक्का यानी पूरब कोहली अपने दोस्त और उसकी बहन के घर में ही रहता है और उसके दोस्त की बहन कजरी यानी तनिष्ठा चटर्जी उसे मन ही मन चाहती है, पर बक्का की पसंद है, दुश्मन गांव की केसर यानी कीर्ति कुलकर्णी।

बक्का की प्रेम कहानी तो फिल्म में एक छोटा पर महत्वपूर्ण अंश है, पर 'जल' कहानी है, मरुस्थल में प्यास से जूझते इंसान की, जहां रुपया, पैसा, जेवर से ज्यादा कीमत है पानी की।

फिल्म में टूरिस्ट के तौर पर रूस आई सइदा ज्यूल्स, जो यह देखकर परेशान हो जाती है कि रण ऑफ कच्छ में फ्लेमिंगोस खारे पानी की वजह से मर रहे हैं और वह उन्हें बचाने का फैसला करती है।

सरकार की मदद से पानी निकालने की मशीनें मंगवाई जाती हैं और जल का देवता बक्का पानी खोज निकालता है जबकि आधुनिक तकनीक बक्का के हुनर के आगे मात खा जाती है। 'जल' मनोरंजन के साथ एक संदेश भी देती है कि दुनिया और देश को फ्लेमिंगोस की तो चिंता है, पर प्यास से मरते इंसानों की नहीं।

सबसे पहले में तारीफ करना चाहूंगा सिनेमेटोग्राफर सुनीता राडिया की, जिन्होंने बहुत-ही खूबसूरती से रण ऑफ कच्छ को फिल्माया है। उसके बाद तनिष्ठा और कीर्ति की अदाकारी की। मुकुल देव ने भी अपनी खलनायक की भूमिका बखूबी निभाई है। पूरब भी अपने किरदार में अच्छे हैं, पर मरुस्थल को बाकी गांववालों के साथ अपने चेहरे-मोहरे के साथ घुला-मिला नहीं पाते। शायद उन्हें कुछ दिन वाकई मरुस्थल में रहने की जरूरत थी, नहीं तो मेकअप पर थोड़ा और काम करना चाहिए था।

फिल्म के मोमेंट्स कहानी को स्लो कर देते हैं और इसकी वजह शायद यह भी है कि कॉमेडी घोलकर जो मोमेंट्स रचने की कोशिश की गई, वह हम पहले बहुत देख चुके हैं, जैसे गोरी मेम की तरफ गांव का आकर्षण। अंग्रेजी न समझने की वजह से कॉमेडी लाने की कोशिश।

Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com


काश कॉमेडी के लिए कुछ नए नुस्खे आजमाए जाते। साथ ही कुछ एक्टर्स थोड़े लाउड थे, यानी उनकी एक्टिंग रंगमंच की एक्टिंग लगती है, लेकिन फिर भी यह फिल्म आपको बांधे रखती है। गिरीश मलिक की अच्छी कोशिश पर निर्देशन में थोड़ी पकड़ और जरूरी है। सोनू निगम और बिक्रम घोष का अच्छा संगीत और स्क्रीन प्ले। कुल मिलाकर यह 'जल' उन दर्शकों की प्यास बुझाएगी, जो बॉलीवुड का खारा नहीं बल्कि मीठा पानी पीने के आदी हैं। मेरी तरफ से फिल्म को 3.5 स्टार्स।