
नई दिल्ली:
सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म निर्देशक मधुर भंडारकर के खिलाफ बलात्कार के मामले को चलाने के मुंबई की सेशन्स कोर्ट के आदेश को सोमवार को खारिज कर दिया। सेशन्स कोर्ट के आदेश के खिलाफ भंडारकर सुप्रीम कोर्ट गए थे। गौरतलब है कि अभिनेत्री प्रीति जैन ने 2004 में मधुर भंडारकर पर बलात्कार का आरोप लगाया था।
बता दें कि हाईकोर्ट ने मधुर भंडारकर पर अभिनेत्री प्रीति जैन के साथ बलात्कार और उसे धमकाने का केस चलाने का आदेश दिया था। मुंबई की सेशन कोर्ट ने यह आदेश दिया था।
प्रीति जैन ने मधुर पर चार साल में 16 बार शारीरिक संबंध बनाने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया था। सात साल की न्यायिक लड़ाई के बाद आखिरकार यह मामला सेशन कोर्ट में चलाने का आदेश अंधेरी मेट्रोपोलिटन कोर्ट ने दिया था।
किसी फिल्म की कहानी की तरह इस केस में भी काफी उतार-चढ़ाव आए। 2006 में जो इनवेस्टीगेटिव रिपोर्ट कोर्ट में पेश की गई थी, उसमें प्रीति के साथ बलात्कार करने और धमकाने की बात साफ नहीं हो पा रही थी। इसके बाद मामले की फिर से तहकीकात के आदेश दिए गए थे।
2006 में यह रिपोर्ट फाइल हो गई, जिसके बाद मधुर को 2007 में क्लीन चिट दी गई, लेकिन प्रीति जैन ने उसे गलत ठहराते हुए अंधेरी कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अंधेरी कोर्ट ने प्रीति जैन की अपील को गौर से देखा और इस रिपोर्ट को 2009 में गलत ठहराते हुए जांच अधिकारी को फिर से रिपोर्ट फाइल करने के लिए कहा।
प्रीति ने उस वक्त डीसीपी मीरा बोरवणकर से मिलकर मधुर भंडारकर से मिले धमकी भरे ईमेल और मधुर उसे जहां लेकर जाते थे उस होटल के रिकॉर्ड पेश किए। इनको आधार मानकर कोर्ट ने मामला सेशन कोर्ट में चलाने का आदेश दिया था।
बता दें कि हाईकोर्ट ने मधुर भंडारकर पर अभिनेत्री प्रीति जैन के साथ बलात्कार और उसे धमकाने का केस चलाने का आदेश दिया था। मुंबई की सेशन कोर्ट ने यह आदेश दिया था।
प्रीति जैन ने मधुर पर चार साल में 16 बार शारीरिक संबंध बनाने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया था। सात साल की न्यायिक लड़ाई के बाद आखिरकार यह मामला सेशन कोर्ट में चलाने का आदेश अंधेरी मेट्रोपोलिटन कोर्ट ने दिया था।
किसी फिल्म की कहानी की तरह इस केस में भी काफी उतार-चढ़ाव आए। 2006 में जो इनवेस्टीगेटिव रिपोर्ट कोर्ट में पेश की गई थी, उसमें प्रीति के साथ बलात्कार करने और धमकाने की बात साफ नहीं हो पा रही थी। इसके बाद मामले की फिर से तहकीकात के आदेश दिए गए थे।
2006 में यह रिपोर्ट फाइल हो गई, जिसके बाद मधुर को 2007 में क्लीन चिट दी गई, लेकिन प्रीति जैन ने उसे गलत ठहराते हुए अंधेरी कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अंधेरी कोर्ट ने प्रीति जैन की अपील को गौर से देखा और इस रिपोर्ट को 2009 में गलत ठहराते हुए जांच अधिकारी को फिर से रिपोर्ट फाइल करने के लिए कहा।
प्रीति ने उस वक्त डीसीपी मीरा बोरवणकर से मिलकर मधुर भंडारकर से मिले धमकी भरे ईमेल और मधुर उसे जहां लेकर जाते थे उस होटल के रिकॉर्ड पेश किए। इनको आधार मानकर कोर्ट ने मामला सेशन कोर्ट में चलाने का आदेश दिया था।
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