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This Article is From Jul 13, 2016

मराठी और मलयाली फिल्मों से सीख लेनी चाहिए बॉलीवुड को : मनोज बाजपेयी

मराठी और मलयाली फिल्मों से सीख लेनी चाहिए बॉलीवुड को : मनोज बाजपेयी
मनोज बाजपेयी (फाइल फोटो)
मुंबई: अपने सशक्त अभिनय के लिए जाने जाने वाले अभिनेता मनोज बाजपेयी मराठी सिनेमा और मलयाली सिनेमा से बहुत प्रभावित हुए हैं। हालांकि मनोज भी इसी तरह के प्रायोगिक सिनेमा के कई बार हिस्सा रहे हैं, मगर मराठी और मलयाली सिनेमा ने मनोज पर ऐसा प्रभाव छोड़ा है कि वह हिंदी सिनेमा को सीख लेने की सलाह देते हैं।

अपनी आने वाली फिल्म 'बुधिया सिंह- बॉर्न टू रन' के प्रचार के दौरान मनोज ने कहा कि जिस तरह से मराठी और मलयाली सिनेमा ओरिजिनल काम कर रहे हैं, जिस तरह की कहानियां इन दोनों भाषाओं में दिखाई जा रही हैं, इससे हिंदी सिनेमा को सीख लेनी चाहिए।

अच्छी कहानियों पर फिल्म नहीं बन रही
ज़ाहिर है कि पिछले से कुछ सालों से दक्षिण भारत की फिल्मों को हिंदी में बनाने का चलन चल गया है। पुरानी हिंदी फिल्मों को रीमेक किया जा रहा है। ऐसे में नई कहानियां हिंदी फिल्मों में कम नज़र आती हैं और इस पर कई बार सवाल उठ चुके हैं कि हिंदी फ़िल्मकार नई और अच्छी कहानियों पर फिल्म नहीं बना रहे हैं।

बनना चाहते हैं मराठी फिल्म का हिस्सा
उधर दूसरी तरफ़ मराठी भाषा में इन दिनों 'सैराट' और नटसम्राट जैसी बेहतरीन फिल्में बन रही हैं और अच्छा कारोबार कर रही हैं। ऐसे में मनोज भी मराठी फिल्म का हिस्सा बनना चाहते हैं, मगर उन्हें दुख इस बात का है कि उन्हें मराठी भाषा नहीं आती। मनोज ने कहा कि काश मुझे थोड़ी बहुत मराठी आती। मैं भी मराठी फिल्म का ख़ुशी ख़ुशी हिस्सा बनता।

5 अगस्त को रिलीज़ होगी फिल्म
मनोज इन दिनों अपनी आने वाली फिल्म 'बुधिया सिंह- बॉर्न टू रन' के प्रचार में लगे हुए हैं। यह फिल्म बुधिया सिंह नामक नन्हें धावक की ज़िन्दगी पर आधारित है जिसने महज़ 5 साल की उम्र में 48 मैराथन में हिस्सा लिया था, जिसमें भुवनेश्वर से पूरी तक की दौड़ शामिल है। मनोज इस फिल्म में बुधिया के कोच की भूमिका निभा रहे हैं। यह फिल्म 5 अगस्त को रिलीज़ होगी।

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