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‘बदले’ का ऐलान? ईरान में खामेनेई की मौत के बाद जामकरान मस्जिद पर लाल झंडा क्यों फहराया गया

ईरान की जामकरान मस्जिद पर इस्लामिक रिवोल्यूशन के नेता की शहादत के बाद बदले का प्रतीक माने जाने वाला लाल झंडा फहराया गया.

‘बदले’ का ऐलान? ईरान में खामेनेई की मौत के बाद जामकरान मस्जिद पर लाल झंडा क्यों फहराया गया
  • ईरान की जामकरान मस्जिद के गुंबद पर लाल झंडा फहराया गया है जो शहादत और अन्याय के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक है
  • लाल झंडा शिया इस्लामिक परंपरा में बड़ी शहादत के बदले की प्रतीक्षा का संकेत देता है
  • मस्जिद पर लाल झंडा फहराने को राजनीतिक और वैचारिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है
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तेहरान:

ईरान में धार्मिक और राजनीतिक तौर पर अहम मानी जाने वाली जामकरान मस्जिद एक बार फिर सुर्खियों में है. मस्जिद के गुंबद पर लाल झंडा फहराया गया है, जिसे शिया परंपरा में शहादत और अन्याय के खिलाफ संघर्ष के प्रतीक के रूप में देखा जाता है. यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है, जब ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेतृत्व से जुड़ी शहादत की खबरों और दावों को लेकर माहौल बेहद संवेदनशील बना हुआ है.जानकारी के मुताबिक, यह लाल झंडा कुछ ही समय पहले जामकरान मस्जिद के मुख्य गुंबद पर लगाया गया. 

ये लाल झंडे क्यों लगाए जाते हैं?

शिया इस्लामिक परंपरा में लाल झंडा यह संकेत देता है कि किसी बड़ी शहादत का बदला लिया जाना अभी बाकी है. ऐसे में इस पवित्र स्थल पर झंडे का फहराया जाना केवल धार्मिक भावनाओं तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसके गहरे राजनीतिक और वैचारिक मायने भी निकाले जा रहे हैं.

जामकरान मस्जिद ईरान ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के शिया मुसलमानों के लिए अत्यंत पवित्र स्थल मानी जाती है. यहां होने वाली हर गतिविधि पर न सिर्फ ईरान के लोग, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी नजर रहती है. ऐसे में मस्जिद पर लाल झंडा फहराए जाने को एक सख्त संदेश और भावनात्मक प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है.

फिलहाल इस प्रतीकात्मक कदम के बाद किसी ठोस कार्रवाई या आगे की रणनीति को लेकर ईरानी नेतृत्व की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. हालांकि, इस घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया में पहले से मौजूद तनाव को और गहरा कर दिया है. विश्लेषकों का मानना है कि यह संकेत समर्थकों को एकजुट करने और विरोधियों को चेतावनी देने के उद्देश्य से दिया गया हो सकता है.

समर्थकों में उत्साह और राजनीतिक संदेश देने की है कोशिश

विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान में इस तरह के धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल अक्सर बड़े राजनीतिक संदेश देने के लिए किया जाता है. आने वाले दिनों में इस कदम का क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर क्या असर पड़ेगा, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है.

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