ईवीएम हैकिंग पर हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में कपिल सिब्बल भी मौजूद थे
नई दिल्ली:
- ईवीएम हैंकिग की पटकथा के लिए सहारा लिया गया गोपीनाथ मुंडे की मौत का, वे इसे हत्या बता रहे हैं. जबकि डॉक्टर ने कहा कि वह हत्या नहीं थी. आखिर इस झूठे के पीछे कौन है.
- दूसरा बकवास है कि बाकी सब चुनाव गड़बड़ थे. तो फिर क्या एमपी, राजस्थान और छत्तीसगढ के चुनाव में ऐसा नहीं हुआ?
- पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में न कोई सबूत दिया गया और न पत्रकारों को सवाल पूछने दिया गया.
- मैं पूछना चाहता हूं कि कपिल सिब्बल वहां क्या कर रहे थे. वह वहां किस हैसियत से मौजूद थे.
- कपिल सिब्बल कांग्रेस की तरफ से मॉनिटरिंग करने गए थे? कांग्रेस हमेशा उनसे ऐसा काम कराती है. चाहे बात राम मंदिर की बात हो या महाभियोग की बात.'
- 'मैं पूछना चाहता हूं कि इस पूरे आयोजन से क्या 2014 में देश के जनमत का अपमान नहीं हो रहा है. क्या यह 90 करोड़ मतदाताओं का अपमान नहीं है.
- 2014 में हैकिंग से चुनाव जीतें हैं. ईवीएम आज से नहीं बहुत दिनों से काम कर रहा है. 10 साल यूपीए सत्ता में रही, तब ईवीएम ठीक रही?
- 2007 में मायावती जीतीं तो ईवीएम ठीक था? 2012 में अखिलेश जी जीते तो ईवीएम ठीक था? ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल जीते तो ईवीएम ठीक था?
- 2017 में चुनाव आयोग ने खुली चुनौती दी थी कि कोई भी पार्टी आकर यह साबित करे कि ईवीएम को हैक किया जा सकता है. तब कोई क्यों नहीं आगे आया? यह सैय्यद शुजा भी उस समय नहीं दिखे.
- क्या कांग्रेस ने 2014 के जनादेश के अपमान करने के लिए इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को प्रयोजित किया था?
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