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This Article is From Dec 21, 2017

2G स्‍पेक्‍ट्रम: राजा और कनिमोई समेत 15 बरी, कोर्ट ने कहा-घोटाला हुआ ही नहीं, फैसले की 10 बातें

सीबीआई कोर्ट ने कहा, किसी ने दूरसंचार मंत्रालयल के किसी वर्जन पर विश्वास नहीं किया जा सकता. सभी ने इसमें एक बडा घोटाला देखा, जबकि ऐसा हुआ ही नहीं था. आरोपियों के खिलाफ दलीलों को साबित करने वाले पुख्ता सबूत नहीं और अधिकारियों की समझदारी सवालों के घेरे में है. उनको कई चीजों के अर्थ तक मालूम नहीं थे.

2G स्‍पेक्‍ट्रम: राजा और कनिमोई समेत 15 बरी, कोर्ट ने कहा-घोटाला हुआ ही नहीं, फैसले की 10 बातें
2G स्‍पेक्‍ट्रम घोटाले में सीबीआई कोर्ट ने ए राजा और कनिमोई समेत 15 आरोपियों को बरी किया
  • दूरसंचार मंत्रालयल के किसी वर्जन पर विश्वास नहीं किया जा सकता: कोर्ट
  • रिकॉर्ड में ऐसा कोई सबूत नहीं है जो आरोपियों की अपराध को साबित करे: कोर्ट
  • सीबीआई का आरोप-पत्र वेल कोरियोग्राफ्ड है: कोर्ट
नई दिल्ली:
  1. सीबीआई कोर्ट ने कहा, किसी ने दूरसंचार मंत्रालयल के किसी वर्जन पर विश्वास नहीं किया जा सकता. सभी ने इसमें एक बडा घोटाला देखा, जबकि ऐसा हुआ ही नहीं था. आरोपियों के खिलाफ दलीलों को साबित करने वाले पुख्ता सबूत नहीं और अधिकारियों की समझदारी सवालों के घेरे में है. उनको कई चीजों के अर्थ तक मालूम नहीं थे.
  2. सीबीआई जज ने कहा कि मैं यह भी जोड़ना चाहूंगा कि पिछले लगभग सात साल से पूरी तन्मयता के साथ सभी कार्यदिवसों पर, जिनमें ग्रीष्मावकाश भी शामिल हैं, ओपन कोर्ट में सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक बैठा रहा और इंतज़ार करता रहा कि कोई शख्स कानूनन स्वीकार्य सबूत लेकर सामने आएगा, लेकिन सब व्यर्थ गया. कोई भी सामने नहीं आया. इससे संकेत मिलता है कि हर कोई अफवाहों, गपशप और अटकलों के आधार पर बनी सार्वजनिक धारणा के हिसाब से चल रहा है. बहरहाल, सार्वजनिक धारणा का न्यायिक कार्यवाही में कोई स्थान नहीं होता.
  3. कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड ओर ऐसा कोई सबूत नहीं है जो आरोपियों की अपराध को साबित करता हो. फिर चाहे वो कट ऑफ डेट के फिक्स करने की बात हो या पहले आओ पहले पाओ नीति के मैन्युपुलेशन का मामला हो, कंपनियों को स्पेक्ट्रम देने की बात हो या कलाईनार टीवी को 200 करोड़ रुपये रिश्वत के तौर पर देने का आरोप हो.
  4. अदालत ने कहा कि इस केस के आरोपपत्र ऑफिशियल रिकॉर्ड की मिसरीडिंग और संदर्भ से हट कर है. 
  5. कोर्ट ने कहा कि आरोप-पत्र जांच के दौरान गवाहों के तरफ से दी हुई मौखिक गवाही पर आधारित है, जो गवाहों ने कोर्ट में गवाही के दौरान नहीं बोली. अगर गवाहों ने मौखिक तौर पर बयान दिया है और अधिकारिक रिकॉर्ड के खिलाफ जाते है तो कानून में मान्य नहीं है.
  6. आरोपपत्र में रिकॉर्ड किये गए बहुत से तथ्य गलत हैं. मसलन एंट्री फीस के रिवीजन की वित्त सचिव द्वारा सिफारिश करना और एंट्री फीस के रिवीजन को ट्राई द्वारा सिफारिश.
  7. कोर्ट ने कहा नतीजा यही है और मुझे ये कहने में बिल्कुल भी संकोच नहीं है कि आरोपियों के खिलाफ केस को साबित करने में अभियोजन पक्ष बुरी तरह से नाकाम रहा है. कोर्ट ने कहा कि सीबीआई का आरोप-पत्र वेल कोरियोग्राफ्ड है.
  8. अभियोजन पक्ष तो ये ही तय नहीं कर पाया कि वो आखिर साबित क्या करना चाहता है? 
  9. कटऑफ डेट, फर्स्ट कम फर्स्ट सर्व थ्योरी जैसे कई मुद्दों पर आरोपियों के खिलाफ किसी आपराधिक साज़िश का सबूत अभियोजन पक्ष कोर्ट में रिकॉर्ड पर नहीं दे पाया.
  10. अभियोजन पक्ष की दलील, गवाहों के बयान और पेश किए गए सबूत के बीच तालमेल ही नहीं दिखा.

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