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This Article is From Sep 18, 2022

सितंबर की इस तारीख में पड़ेगी Indira Ekadashi, यहां जानिए शुभ मुहूर्त और कथा

Indira ekadashi importance : अगर आप अपने पितरों को मोक्ष दिलाना चाहते हैं तो इस व्रत को पितर पक्ष के महीने में जरूर करें इससे पूर्वजों को स्वर्ग में जगह मिलेगी.

सितंबर की इस तारीख में पड़ेगी Indira Ekadashi, यहां जानिए शुभ मुहूर्त और कथा
Pitru paksha में पड़ने वाली एकादशी को इंदिरा एकादशी के नाम से जाता जाता है.
  • एकादशी तिथि की 20 सितंबर को रात 9 बजकर 26 मिनट से हो रही है.
  • इंदिरा एकादशी का व्रत 21 सितंबर को रखा जाएगा.
  • इंदिरा एकादशी व्रत का पारण 22 सितंबर को किया जाएगा.

Indira Ekadashi Date and shubh muhurat : एकादशी का व्रत हर महीने होता है. सभी एकादशी का अपना महत्व है लेकिन पितृ पक्ष के महीने में पड़ने वाली एकादशी का विशेष महत्व होता है. इस इंदिरा एकादशी का उपवास जो लोग करते हैं उससे उनके पूर्वजों को स्वर्ग की प्राप्ति होती है. यह व्रत हमारे पितरों को यमलोक से छुटकारा दिलाता है. आपको बता दें कि इस व्रत को राजा इंद्र सेन (king Indrsen) ने रखा था. नारद मुनि ने इस व्रत की उपयोगिता और महत्व के बारे में बताया है. तो चलिए जान लेते हैं इस व्रत की तारीख, शुभ मुहूर्त और कथा.

इंदिरा एकादशी व्रत तारीख एवं शुभ मुहूर्त | Indira ekadashi shubh muhurat and date 

इस बार इंदिरा एकादशी का व्रत 21 सितंबर, बुधवार को पड़ रहा है. एकादशी तिथि की शुरुआत 20 सितंबर को रात 9 बजकर 26 मिनट से हो रही है. वहीं एकादशी तिथि की समाप्ति 21 सितंबर रात 11 बजकर 34 मिनट पर हो रही है. ऐसे में उदया तिथि के मुताबिक इंदिरा एकादशी का व्रत 21 सितंबर को रखा जाएगा. इसके अलावा इंदिरा एकादशी व्रत का पारण 22 सितंबर को किया जाएगा. आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी के दिन अगर विधिवत व्रत रखकर पूजा की जाती है तो पितरों का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है. 

इंदिरा एकादशी की व्रत कथा | Indira ekadashi vrat katha

जैसा की हमने ऊपर बताया है कि इस व्रत को सबसे पहले राजा इंद्रसेन ने किया था. यह सतयुग में महिष्मति नामक राज्य के राजा थे. राजा इंद्रसेन भगवान विष्णु के भक्त थे. नारद मुनि से एकबार इन्हे संदेश मिलता है कि उनके पिता अपने बुरे कर्मों की वजह से यमलोक में हैं. इससे मुक्ति दिलाने के लिए उन्हें इंदिरा एकादशी (INDIRA EKADASHI) का व्रत रखना होगा. इसके बारे में नारद मुनि राज इंद्रसेन को बताते हैं कि यह उपवास कैसे रखा जाएगा. नारद बताते हैं कि एकादशी तिथि से पूर्व दशमी को पितरों का श्राद्ध करने के बाद एकादशी को व्रत का संकल्प लें. राजा ने ऐसे ही किया जिसके बाद उनके पिता को मोक्ष की प्राप्ति होती है. तब से लोग अपने पूर्वजों को यमलोक से मुक्ति दिलाने के लिए यह व्रत करते हैं.

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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