गुरु पूर्णिमा सनातन धर्म का एक बेहद पवित्र पर्व है. इस दिन गुरु के प्रति श्रद्धा व्यक्त की जाती है और महर्षि वेदव्यास जयंती भी मनाई जाती है. हर साल की तरह इस बार भी लोगों के मन में सवाल है कि गुरु पूर्णिमा का व्रत 28 जुलाई को रखा जाए या 29 जुलाई को. ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल पांडेय ने इसकी सही तिथि और पूजा का महत्व बताया है.
कब रखा जाएगा गुरु पूर्णिमा का व्रत?
पंडित कौशल पांडेय के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 28 जुलाई 2026 को शाम 6:19 बजे शुरू होगी और 29 जुलाई को रात 8:06 बजे समाप्त होगी. शास्त्रीय नियमों के अनुसार, पूर्णिमा तिथि मध्यरात्रि में रहने के कारण गुरु पूर्णिमा का व्रत 28 जुलाई को रखा जाएगा, जबकि 29 जुलाई को दान-पुण्य और अन्य धार्मिक कार्य करना शुभ रहेगा.
क्या है गुरु पूर्णिमा का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था. इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है. इस दिन गुरु का सम्मान करने, उनका आशीर्वाद लेने और कृतज्ञता व्यक्त करने का विशेष महत्व है.
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ऐसे करें पूजा
पंडित कौशल पांडेय के अनुसार, सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें. अपने गुरु का आशीर्वाद प्राप्त करें. शाम को भगवान विष्णु और गुरु की पूजा करें. सत्यनारायण कथा का पाठ करें, प्रसाद अर्पित करें और चंद्रदेव को अर्घ्य देकर व्रत करें.
दान का भी है विशेष महत्व
उन्होंने बताया कि इस दिन अन्न, वस्त्र, धन और जरूरत की वस्तुओं का दान करना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है. मान्यता है कि इससे ज्ञान, सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है.
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