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US Iran War: ट्रंप के बयान पर आखिर क्यों गुस्से में है भारत के पादरी?

US Iran War: डोनाल्ड ट्रंप ने जिस बाइबिल पर हाथ रखकर अमेरिकी राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी, आज वे उसी बाइबिल का हवाला देते हुए अमेरिका-ईरान युद्ध को कयामत के दिन से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं. ईरान के साथ लड़ी जा रही लड़ाई को ट्रंप द्वारा धर्मयुद्ध से जोड़ने की कवायद को भारतीय चर्च से जुड़े पादरी आखिर क्यों सिरे से नकार रहे हैं, जानने के लिए जरूर पढ़ें ये लेख. 

US Iran War: ट्रंप के बयान पर आखिर क्यों गुस्से में है भारत के पादरी?
US Iran War: ईरान-अमेरिका युद्ध का कयामत कनेक्शन
File Photo

US Iran War: डोनाल्ड ट्रंप ने जिस बाइबिल की शपथ लेकर बतौर राष्ट्रपति अपने कार्यकाल की शुरुआत की थी, आज वे उसी का हवाला देते हुए ईरान-अमेरिका युद्ध में अपने सैनिकों की भागीदारी को भगवान की दिव्य योजना का हिस्सा बताते हुए युद्ध के निर्णय को जायज ठहराने की कोशिश कर रहे हैं. ट्रंप जहां उन भविष्यवाणियों का सहारा ले रहे हैं, जिसमें कयामत के समय आर्मागेडन और जीसस क्राइस्ट के आने का जिक्र हैं, तो वहीं भारतीय चर्च से जुड़े पादरी उनकी बातों को तर्क नहीं कुतर्क बता रहे हैं. 

ट्रंप ईसाई धर्म के प्रतिनिधि नहीं हैं 

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कोलकाता के ईसाई पादरी और इंटर-फेथ पीस एंबेसडर रेव. फादर गौरव सिंघ रे  कहते हैं कि डोनाल्ड ट्रंप एक बिज़नेस टाइकून हैं, जो पॉलिटिशियन बन गए हैं. वे ईसाई धर्म के प्रतिनिधि या फिर उसकी आधिकारिक अवाज नहीं हैं. हमारे यहां वेटिकन सिटी में पोप या फिर ऑर्थोडॉक्स पैट्रिआर्क ईसाई धर्म के प्रतिनिधि हैं. ट्रंप का धार्मिक ग्रंथों का ज़िक्र करना तुर्की के एर्दोगन के स्टंट जैसा है. दोनों पॉलिटिशियन हैं और दोनों लोगों को भड़काने के लिए धार्मिक ग्रंथों का इस्तेमाल करते हैं."

तब होगा होगा ईश्वर का अवतार 

बहरहाल, कयामत या प्रलय को लेकर जिस तरह हिंदू धर्म में कलयुग के अंत समय में कल्कि अवतार का जिक्र मिलता है, कुछ वैसी ही बातें अन्य सभी धर्मों में लगभग एक ही जैसी देखने को मिलती हैं. फादर गौरव के अनुसार यहूदी और ईसाई धर्म में भी काल के अंत एक ऐसे ही मसीहा आने का जिक्र है. यहूदी लोगों का कहना है कि वह मसीहा अभी तक नहीं आया है और भविष्य में आएगा, जबकि ईसाई धर्म से जुड़े लोगों का मानना है कि वह मसीहा पहले आया था और एक बार फिर दोबारा से वह आएगा. 

ट्रंप जिस कयामत का जिक्र करते हुए ईसा मसीह की वापसी (Second Coming) की बात कह रहे हैं, उसके लिए कुछेक बातों का इशारा बाइबिल में किया गया है. जैसे पृथ्वी पर जब प्राकृतिक अपदाएं बढ़ जाएंगी, युद्ध और तनाव बड़े स्तर पर बढ़ जाएगा तब धर्म और अधर्म की बीच होने वाले युद्ध के समय ईसा मसीह दोबारा आएंगे, लेकिन यह कब होगा, इसके बारे में कोई स्पष्ट रूप से नहीं कह सकता है. यह बात अलग है कि बाइबिल के इस कथन के जरिए दुख भोग रहे लोगों के मन में आशा को पैदा करने और निराशा को दूर करने का प्रयास किया जाता है. 

सिर्फ ईश्वर को मालूम कब होगा अवतार

नोएडा स्थि​त सेंट मैरीज चर्च के फॉदर  जॉन रोशन के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति बाइबल (Bible) की बातों को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहे हैं. कयामत कब आएगी? ईसा मसीह का दोबारा अवतार कब होगा और कैसे होगा? इसके बारे में कोई नहीं बता सकता है. बाइबल में स्पष्ट लिखा है कि -  प्रुभ ईसा मसीह (Jesus Christ) ने जिस मानव पुत्र के आने की बात कही है, वह कब आएगा. यह बात प्रभु ईशु को भी नहीं मालूम, यह बात सिर्फ परमपिता परमेश्वर को ही मालूम है. वह धर्म का कार्ड खेल रहे हैं. ईश्वर कभी नहीं चाहेगा कि हम एक दूसरे को नष्ट करें. ईश्वर के लिए सभी लोग बराबर हैं. 

जॉन रोशन के अनुसार लड़ाई-झगड़े पहले से होते चले आ रहे हैं. विश्वयुद्ध प्रथम के बाद विश्वयुद्ध द्वितीय हुआ. तब भी लोग कहते थे कि ये अंतिम समय है. दुनिया समाप्त हो जाएगी. कुछ ऐसे ही सन् 2000 के बाद दुनिया को समाप्त होने का दावा कर रहे थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. दअरसल, डोनाल्ड ट्रंप ने जो युद्ध का फैसला लिया है, वह गलत साबित हो रहा है. वह अपने को सही साबित करने के लिए बाइबल का सहारा ले रहा है. जबकि कोई भी धर्म हो दुनिया में इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं है. मानवता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है.

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