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सूर्यदेव को जल देते समय क्या बोलना चाहिए? आज रविवार को इस विधि से चढ़ाएं जल, पढ़ें सूर्यदेव की आरती

आइए जानते हैं रविवार के दिन सूर्यदेव को जल चढ़ाने की सही विधि क्या है, साथ ही जानेंगे जल चढ़ाते समय किन मंत्रों का जाप करना चाहिए-

सूर्यदेव को जल देते समय क्या बोलना चाहिए? आज रविवार को इस विधि से चढ़ाएं जल, पढ़ें सूर्यदेव की आरती
रविवार को सूर्यदेव को जल चढ़ाने की सही विधि
(Photo Credit: NDTV)

हिंदू धर्म में सूर्यदेव को ऊर्जा, प्रकाश और जीवन का आधार माना गया है. रविवार का दिन खासतौर पर सूर्यदेव की पूजा के लिए शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से सूर्यदेव को जल अर्पित करने और उनके मंत्रों का जाप करने से जीवन में सकारात्मकता आती है, आत्मविश्वास बढ़ता है, घर में सुख-शांति बनी रहती है और व्यक्ति को उसके हर काम में सफलता मिलने लगती है. ऐसे में आइए जानते हैं रविवार के दिन सूर्यदेव को जल चढ़ाने की सही विधि क्या है, साथ ही जानेंगे जल चढ़ाते समय किन मंत्रों का जाप करना चाहिए-

सूर्यदेव को जल चढ़ाने की विधि

  • रविवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें. आज के दिन लाल या नारंगी रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है.
  • इसके बाद तांबे के लोटे में साफ जल भरें. इसमें लाल फूल, अक्षत, रोली, चंदन और थोड़ा सा गुड़ डालें.
  • सूर्यदेव की ओर मुख करके खड़े हों और धीरे-धीरे जल अर्पित करें.
  • जल चढ़ाते समय सूर्यदेव का ध्यान करें मंत्र का जाप करें.
  • अर्घ्य देने के बाद हाथ जोड़कर सूर्यदेव को प्रणाम करें, आरती गाएं और अपनी मनोकामना उनके सामने रखें.
जल चढ़ाते समय करें इन मंत्रों का जाप

ॐ आदित्याय विद्महे दिवाकराय धीमहि तन्नो सूर्यः प्रचोदयात्।।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस मंत्र के जाप से बुद्धि और सोचने-समझने की क्षमता बेहतर होती है. साथ ही नौकरी, व्यापार और करियर में तरक्की मिलने लगती है.

ॐ सूर्याय नमः

मान्यता है कि इस मंत्र का जाप करने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है, आर्थिक स्थिति बेहतर होती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है.

ॐ घृणिः सूर्याय नमः

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस मंत्र का जाप करने से नकारात्मक विचारों और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है.

ऐसे में जल अर्पित करते समय आप अपनी श्रद्धा और विश्वास के अनुसार इन मंत्रों का जाप कर सकते हैं. मान्यता है कि रविवार के दिन सच्चे मन से सूर्यदेव को याद करने और उनकी आराधना करने से जीवन में अच्छे बदलाव आने लगते हैं.

सूर्यदेव की आरती

ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।
जगत् के नेत्रस्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।
धरत सब ही तव ध्यान, ॐ जय सूर्य भगवान।।
।। ॐ जय सूर्य भगवान ।।

सारथी अरुण हैं प्रभु तुम, श्वेत कमलधारी। तुम चार भुजाधारी।।
अश्व हैं सात तुम्हारे, कोटि किरण पसारे। तुम हो देव महान।।
।। ॐ जय सूर्य भगवान ।।

ऊषाकाल में जब तुम, उदयाचल आते। सब तब दर्शन पाते।।
फैलाते उजियारा, जागता तब जग सारा। करे सब तब गुणगान।।
।। ॐ जय सूर्य भगवान ।।

संध्या में भुवनेश्वर अस्ताचल जाते। गोधन तब घर आते।।
गोधूलि बेला में, हर घर हर आंगन में। हो तव महिमा गान।।
।। ॐ जय सूर्य भगवान ।।

देव-दनुज नर-नारी, ऋषि-मुनिवर भजते। आदित्य हृदय जपते।।
स्तोत्र ये मंगलकारी, इसकी है रचना न्यारी। दे नव जीवनदान।।
।। ॐ जय सूर्य भगवान ।।

तुम हो त्रिकाल रचयिता, तुम जग के आधार। महिमा तब अपरम्पार।।
प्राणों का सिंचन करके भक्तों को अपने देते। बल, बुद्धि और ज्ञान।।
।। ॐ जय सूर्य भगवान ।।

भूचर जलचर खेचर, सबके हों प्राण तुम्हीं। सब जीवों के प्राण तुम्हीं।।
वेद-पुराण बखाने, धर्म सभी तुम्हें माने। तुम ही सर्वशक्तिमान।।
।। ॐ जय सूर्य भगवान ।।

पूजन करतीं दिशाएं, पूजे दश दिक्पाल। तुम भुवनों के प्रतिपाल।।
ऋतुएं तुम्हारी दासी, तुम शाश्वत अविनाशी। शुभकारी अंशुमान।।
।। ॐ जय सूर्य भगवान ।।

ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।
जगत् के नेत्रस्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।स्वरूपा।।
धरत सब ही तव ध्यान,
।। ॐ जय सूर्य भगवान ।।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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