देवभूमि उत्तराखंड की हर घाटी, नदी और पहाड़ों में देवी-देवताओं का वास माना जाता है. पौड़ी गढ़वाल जिले के श्रीनगर में अलकनंदा नदी के तट पर स्थित श्री कामेश्वर महादेव मंदिर ऐसी ही एक पवित्र और प्राचीन धरोहर है. मान्यता है कि यह मंदिर भगवान शिव के काम यानी इच्छाओं को पूर्ण करने वाला स्वरूप है. स्कंद पुराण के केदारखंड के अनुसार, त्रेतायुग में रावण का वध करने के बाद भगवान राम को ब्रह्म हत्या का पाप लगा था. इस दोष के प्रायश्चित और मुक्ति के लिए भगवान राम ने गुरु वशिष्ठ के निर्देश पर इस स्थान पर आकर भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी. यह मंदिर हिमालय क्षेत्र में स्थित भगवान शिव के पांच महत्वपूर्ण महेश्वर पीठों में से एक है.
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंदिर को लेकर एक वीडियो शेयर किया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वीडियो पोस्ट कर लिखा, "पौड़ी गढ़वाल के श्रीनगर में मौजूद श्री कामेश्वर महादेव मंदिर, देवभूमि के पुराने और मशहूर शिव मंदिरों में से एक है. स्कंद पुराण में बताया गया यह पवित्र धाम भगवान शिव की पूजा और भक्ति का एक बड़ा केंद्र है. अगर आप श्रावण के पवित्र महीने में पौड़ी गढ़वाल इलाके में घूम रहे हैं, तो देवाधिदेव महादेव के इस दिव्य धाम के दर्शन जरूर करें".
कामेश्वर महादेव मंदिर का पौराणिक महत्व
मान्यता है कि त्रेतायुग में रावण वध के पश्चात ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति पाने के लिए भगवान राम ने यहां भगवान शिव की तपस्या की थी. राम ने शिव जी को 108 कमल के फूल अर्पित करने का संकल्प लिया था. परीक्षा लेने के लिए शिव जी ने एक कमल का फूल छिपा दिया, तब राम जी ने अपनी आंख यानी कमल नयन चढ़ाने का निश्चय किया. उनकी इस अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर शिव जी प्रकट हुए और उन्हें आशीर्वाद दिया. तभी से इस धाम का नाम कमलेश्वर पड़ा.
श्रीनगर, पौड़ी गढ़वाल में स्थित श्री कमलेश्वर महादेव मंदिर देवभूमि के प्राचीन एवं पौराणिक शिवालयों में से एक है। स्कंद पुराण में वर्णित यह पावन धाम भगवान शिव की आराधना और आस्था का प्रमुख केंद्र है। पवित्र श्रावण मास में यदि आप पौड़ी गढ़वाल क्षेत्र के भ्रमण पर हैं, तो देवाधिदेव… pic.twitter.com/bx9jqFgi0V
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) August 20, 2026
इस मंदिर में बैकुंठ चतुर्दशी के अवसर पर एक विशेष अनुष्ठान होता है. इस रात निसंतान दंपति हाथ में जलता हुआ दीया लेकर रातभर खड़े रहकर भगवान शिव की आराधना करते हैं. मान्यता है कि इस विधि से पूजा करने पर भक्तों को संतान सुख की प्राप्ति होती है. मुख्य गर्भगृह में स्वयंभू भू-लिंग यानी शिवलिंग विराजमान है. इसके साथ ही परिसर में माता गंगा, सरस्वती, अन्नपूर्णा, गणेश जी और पंचमुखी हनुमान की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं.
यह भी पढ़ें:- शिवलिंग पर तांबे या पीतल, किस लोटे से करना चाहिए जलाभिषेक? जानिए क्या कहते हैं धार्मिक नियम
यह भी पढ़ें:- सीधा नहीं, एक तरफ झुका है ये शिव मंदिर, जानिए कत्यूरी काल में बने कपिलेश्वर मंदिर का पौराणिक महत्व
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं