सावन हो या कोई भी शुभ दिन, भगवान शिव की पूजा में शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है. मान्यता है कि शिवलिंग पर जल अर्पित करने से भगवान शिव आसानी से प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं. लेकिन पूजा के बाद कई लोगों के मन में एक सवाल जरूर आता है कि क्या शिवलिंग पर चढ़ा हुआ जल पीना चाहिए या नहीं? इसे लेकर अलग अलग मान्यताएं सुनने को मिलती हैं. आइए जानते हैं कि शिव पुराण में इस बारे में क्या कहा गया है और इस जल को ग्रहण करने के क्या नियम बताए गए हैं.
शिवलिंग पर चढ़ा जल पीना शुभ माना जाता है
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिव पुराण के एक प्रसंग में शिवलिंग पर अर्पित जल को पवित्र माना गया है. इसे चरणामृत के समान श्रद्धा से ग्रहण किया जा सकता है. ऐसी मान्यता है कि इस जल का सेवन करने से व्यक्ति को पॉजिटिव एनर्जी मिलती है. मन को शांति मिलती है और मेंटल टेंशन कम होता है. कई लोग ये भी मानते हैं कि श्रद्धा और विश्वास के साथ इस जल को ग्रहण करने से रोगों से रक्षा और जीवन में सुख समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है.
कैसे करें इस जल का सेवन?
शिवलिंग पर चढ़ाए गए जल को चरणामृत की तरह थोड़ी थोड़ी मात्रा में ग्रहण करने की परंपरा है. मान्यता है कि इसे तीन बार थोड़ा थोड़ा पीना शुभ होता है. हालांकि ये तभी किया जाता है जब जल पूरी तरह साफ हो और पूजा की परंपरा के अनुसार ग्रहण करने योग्य हो. मंदिरों में स्थानीय नियमों का पालन करना भी जरूरी होता है.
जल ग्रहण करते समय रखें ये सावधानियां
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिवलिंग पर चढ़ा जल ग्रहण करते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए. जल पीते समय वो जमीन पर या किसी के पैरों पर नहीं गिरना चाहिए. साथ ही जल ग्रहण करते समय शिवलिंग को स्पर्श करने से भी बचना चाहिए. ऐसा माना जाता है कि इन नियमों का पालन करने से पूजा का शुभ फल प्राप्त होता है.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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