आज 30 जुलाई से सावन के पावन महीने की शुरुआत हो चुकी है. ऐसे में हर ओर भक्ति का माहौल देखने को मिल रहा है. सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है. मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से सावन में शिव जी की पूजा अर्चना करते हैं, भोलेनाथ उनकी मनोकामनाएं जरूर पूरी करते हैं. वहीं, पूजा के बाद आरती जरूर गाई जाती है. सनातन धर्म में कोई भी पूजा आरती के बिना अधूरी मानी जाती है. ऐसे में आज सावन के पहले दिन शिव पूजा के बाद आप यहां से पढ़कर शिव जी की आरती कर सकते हैं-
यहां पढ़ें भगवान शिव की संपूर्ण आरती
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा.
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥
ॐ जय शिव ओंकारा
एकानन चतुरानन पंचानन राजे,
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥
ॐ जय शिव ओंकारा
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे,
त्रिगुण रूप निरखते, त्रिभुवन जन मोहे॥
ॐ जय शिव ओंकारा
अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी,
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी.
ॐ जय शिव ओंकारा
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥
ॐ जय शिव ओंकारा
कर के मध्य कमण्डलु चक्र त्रिशूल धर्ता,
जगकर्ता जगभर्ता जग संहारकर्ता॥
ॐ जय शिव ओंकारा
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका,
प्रणवाक्षर में शोभित यह त्रिवेद का टीका॥
ॐ जय शिव ओंकारा
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा.
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्द्धांगी धारा॥
ॐ जय शिव ओंकारा
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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