हस्तरेखा शास्त्र में हथेली की अलग-अलग रेखाओं और पर्वतों को व्यक्ति के जीवन से जोड़कर देखा जाता है. इनमें शनि पर्वत पर बनने वाली रेखा को भी खास माना गया है. ऐसी मान्यता है कि अगर यह रेखा साफ, सीधी और गहरी हो तो व्यक्ति को मेहनत के साथ भाग्य का भी साथ मिल सकता है. आचार्य मदन मोहन के अनुसार, यह रेखा हर किसी की हथेली में स्पष्ट रूप से नहीं होती.
कहां होती है शनि रेखा?
आचार्य मदन मोहन ने बताया कि हथेली में बीच वाली उंगली यानी मध्यमा के ठीक नीचे का हिस्सा शनि पर्वत कहलाता है. हस्तरेखा शास्त्र में इसे कर्म, भाग्य और सफलता से जोड़कर देखा जाता है. इसी स्थान पर बनी खड़ी रेखाओं को शनि रेखा के संकेत के तौर पर देखा जाता है.
गहरी और सीधी रेखा हो तो क्या करें
उन्होंने आगे बताया कि अगर शनि पर्वत पर एक साफ और गहरी खड़ी रेखा दिखाई दे, तो इसे शुभ संकेत माना जाता है. मान्यता के अनुसार ऐसे लोग मेहनती होते हैं और उन्हें अपने कााम में सफलता मिलने की संभावना रहती है. आर्थिक स्थिति मजबूत होने और करियर में अच्छा मुकाम मिलने के योग भी बताए जाते हैं.
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दो या तीन रेखाएं क्या बताती हैं?
आचार्य ने बताया कि शनि पर्वत पर दो या तीन खड़ी रेखाएं हों तो इसे भी विशेष संकेत माना जाता है. आचार्य ने बताया कि हस्तरेखा शास्त्र में ऐसी रेखाओं को जीवन में देर से मिलने वाली सफलता और धन से जोड़कर देखाा जाता है. शुरुआती दौर में संघर्ष के बाद स्थिति बेहतर हो सकती है.
कटी-फटी रेखा का क्या है मतलब?
उन्होंने बताया कि अगर शनि पर्वत की रेखा टूटी, कटी या अस्पष्ट हो तो इसे शुभ नहीं मानाा जाता है. ऐसी मान्यता है कि रेखा जीवन में रुकावटों और अधिक संघर्ष की ओर इशारा करती है.
आड़ी-तिरछी रेखाएं हों तो क्या करें
शनि पर्वत पर बहुत सी बारीक आड़ी-तिरछी रेखाएं होने पर हस्तरेखा शास्त्र में व्यक्ति को अधिक सोचने और चिंता करने वालाा बताया जाता है. इसे मानसिक उलझन और जीवन में अस्थिरता से भी जोड़कर देखा जाता है.
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