सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति, व्रत और साधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है. इस दौरान लोग पूजा-पाठ के साथ कई धार्मिक नियमों का पालन भी करते हैं. इन्हीं में एक सवाल अक्सर उठता है कि क्या सावन में बाल, दाढ़ी और नाखून काटना सही है. पंडित आचार्य मदन मोहन के अनुसार, इसे लेकर शास्त्रों में कुछ पारंपरिक मान्यताएं बताई गई हैं, जिनका पालन श्रद्धा के अनुसार किया जाता है.
सावन में क्यों नहीं काटते बाल और नाखून
पंडित आचार्य मदन मोहन बताते हैं कि सावन को तप, संयम और भगवान शिव की आराधना का महीना माना जाता है. इसलिए इस दौरान शरीर के श्रृंगार से जुड़े काम जैसे बाल कटवाना, दाढ़ी बनवाना और नाखून काटना, कई लोग नहीं करते है. ऐसी मान्यता है कि इससे व्रत और पूजा की पवित्रता बनी रहती है.
क्या यह नियम सभी के लिए है जरूरी
आचार्य के अनुसार, यह कोई अनिवार्य धार्मिक नियम नहीं है. ज्योतिष और परंपरा में इसे स्वैच्छिक माना गया है. यदि किसी की नौकरी, स्वास्थ्य या अन्य जरूरी कारण हों तो वह बाल या नाखून कटवा सकता है. भगवान शिव भक्त की भावना को अधिक महत्व देते हैं.
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सावन में किन बातों का रखें ध्यान
सावन के महीने में सात्विक भोजन करने, प्याज-लहसुन और मांसाहार से दूरी बनाने की सलाह दी जाती है. साथ ही भगवान शिव को जल और बेलपत्र अर्पित करना शुभ माना जाता है.
पूजा के साथ रखें मन और घर की शुद्धता
पंडित आचार्य मदन मोहन कहते हैं कि सावन में सबसे जरूरी है मन, वचन और कर्म की पवित्रता. घर की साफ-सफाई रखें, माता-पिता और गुरु का सम्मान करें तथा नकारात्मक विचारों से दूर रहकर भगवान शिव की आराधना करें. यही सावन का वास्तविक संदेश माना जाता है.
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