Sai Baba Ke 11 Vachan: शिरडी के साईं बाबा एक ऐसे संत थे, जिनके भक्त आपको भारत के कोने-कोने में मिल जाएंगे. श्रद्धा, सबूरी और मानवता का प्रतीक माने जाने वाले इस फकीर को कोई अपना गुरु तो कोई उन्हें अपना भगवान मानता है. लाखों-करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र बन चुके साईं बाबा की लोकप्रियता का अंदाजा आप इससे लगा सकते हैं कि आज पूरे भारत में उनके छोटे-बड़े साईं धाम मिल जाएंगे. अगर बात करें उनके मुख्य स्थान शिरडी की तो यहां पर हर रोज हजारों की संख्या में भक्त उनके दर्शन के लिए पहुंचते हैं.
बाबा के इस दरबार में आने वाले भक्तों को सिर्फ नित नये होने वाले चमत्कार ही नहीं बल्कि साईं के द्वारा कही गई वों बातें खींच लाती हैं, जिन्हें उनके अनुयायी साईं के 11 वचन के नाम से जानते हैं. आइए श्रद्धा और विश्वास के केंद्र बन चुके साईं बाबा के उन 11 वचनों के बारे में जानते हैं, जो उनके भक्तों के लिए महामंत्र बन गया है.
साईं बाबा के 11 अनमोल वचन

1. साईं बाबा का पहला वचन है कि - ‘जो शिरडी में आएगा, आपद दूर भगाएगा' अर्थात् जो कोई भी भक्त मुझ पर आस्था और विश्वास रखते हुए शिरडी आएगा उसके सभी दु:ख और तकलीफें दूर हो जाएंगी.
2. साईं बाबा का दूसरा वचन है कि - ‘चढ़े समाधि की सीढ़ी पर, पैर तले दुख की पीढ़ी पर' अर्थात बाबा के दरबार पहुंचकर दर्शन करने मात्र से ही व्यक्ति की सभी कामनाएं शीघ्र ही पूरी हो जाएंगी.
3. साईं बाबा का तीसरा वचन है – ‘त्याग शरीर चला जाऊंगा, भक्त हेतु दौड़ा आऊंगा'. इस वचन का तात्पर्य यह है कि भले ही आज साईं बाबा सशरीर मौजूद न हों लेकिन वे अपने भक्त की करुण पुकार पर मदद के लिए दौड़े चले आएंगे.
4. साईं बाबा का चौथा वचन है कि - ‘मन में रखना दृढ़ विश्वास, करे समाधि पूरी आस', अर्थात् यदि किसी भी भक्त के मन में बाबा के प्रति थोड़ी सी भी श्रद्धा और विश्वास है तो निश्चित रूप पर बाबा उसकी कामनाओं को पूर्ण करेंगे.

5. साईं बाबा का पांचवा वचन है कि ‘मुझे सदा जीवित ही जानो, अनुभव करो सत्य पहचानो'. इस वचन के जरिए साईं अपने भक्तों को आशीर्वाद दिलाना चाहते हैं कि वे अप्रत्यक्ष रूप से उन्हीं के बीच हैं, इसलिए उन्हें हमेशा अपने बीच जीवित ही मानें.
6. साईं बाबा अपने भक्तों को छठे वचन में कहते हैं कि -‘मेरी शरण आ खाली जाए, हो तो कोई मुझे बताए.' अपने इस वचन के जरिए साईं बाबा यह आश्वासन देते हैं कि उनकी शरण में कोई भक्त कभी खाली हाथ नहीं जाएगा.
7. शिरडी के साईं बाबा अपने सातवें वचन में कहते हैं कि - ‘जैसा भाव रहा जिस जन का, वैसा रूप हुआ मेरे मन का' अर्थात् जिस व्यक्ति ने उन्हें देखा और पूजा, वे उसी स्वरूप में उसे दर्शन देते हैं.
8. शिरडी के साईं बाबा अपने आठवें वचन में कहते हैं कि - ‘भार तुम्हारा मुझ पर होगा, वचन न मेरा झूठा होगा' अर्थात् यदि कोई भक्त उनके दरबार में जाता है तो वे उसकी मदद के लिए हमेशा तैयार रहेंगे और उनका कोई भी दिया गया वचन कभी गलत नहीं साबित होगा.

9. साईं बाबा अपने नौवें वचन में कहते हैं कि – ‘आ सहायता लो भरपूर, जो मांगा वो नहीं है दूर' यानि लोगों की मदद के लिए उनका दरबार खुला हुआ है और वहां हर भक्त की मांगी गई मुराद पूरी होने में अब जरा भी देर नहीं लगेगी.
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10. साईं बाबा अपने दसवें वचन में कहते हैं कि - 'मुझमें लीन वचन मन काया, उसका ऋण न कभी चुकाया' अर्थात् जो भक्त उनकी भक्ति में पूरी तरह से लीन है, वे उसके सदा आभारी रहेंगे.
11. साईं बाबा अपने अंतिम ग्यारहवें वचन में कहते हैं कि - ‘धन्य धन्य व भक्त अनन्य, मेरी शरण तज जिसे न अन्य' अर्थात् जो भक्त उनकी भक्ति में पूरी तरह से डूबे हुए हैं, वे धन्य हैं.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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