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Parikrama: मंदिर में देवी-देवताओं की क्यों लगाई जाती है परिक्रमा, जानें इससे जुड़े सभी जरूरी नियम

Parikrama Karne Ke Niyam: सनातन परंपरा में किसी भी तीर्थ स्थान, मंदिर, देवी-देवता की मूर्ति या फिर पवित्र वृक्षों की परिक्रमा क्यों की जाती है? परिक्रमा करने के क्या नियम हैं? किसी देवी या देवता की परिक्रमा करते समय किन बातों का ख्याल रखना चाहिए? इन सभी सवालों के जवाब जानने के लिए पढ़ें ये लेख. 

Parikrama: मंदिर में देवी-देवताओं की क्यों लगाई जाती है परिक्रमा, जानें इससे जुड़े सभी जरूरी नियम
Mandir Ki Parikrama: मंदिर की परिक्रमा के नियम एवं लाभ
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Parikrama Kyon Karte Hain: हिंदू धर्म में किसी भी देव स्थान पर जाने पर अक्सर लोग वहां पर देवी-देवता, मंदिर या फिर उस पूरे पुण्यक्षेत्र की परिक्रमा करते हैं. मान्यता है कि देवी-देवताओं के लिए की जाने वाली इस परिक्रमा से साधक को पुण्य की प्राप्ति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है. हिंदू मान्यता के अनुसार परिक्रमा करने पर चित्त की शुद्धि और पापों का नाश होता है. किसी भी देवी-देवता के लिए की जाने वाली यह परिक्रमा उसके प्रति समर्पण भाव का प्रतीक होती है. परिक्रमा इस बात को दर्शाती है कि संबंधित देवी या देवता हमारी आस्था के केंद्र में हैं. आइए ईश्वर के लिए की जाने वाली परिक्रमा के नियम को विस्तार से जानते हैं. 

किस देवता की कितनी बार परिक्रमा लगाना चाहिए?

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  • सबसे पहले बात प्रथम पूजनीय माने जाने वाले भगवान श्री गणेश की करते हैं. हिंदू मान्यता के अनुसार गणपति का आशीर्वाद पाने के लिए उनकी तीन बार परिक्रमा लगानी चाहिए.
  • जगत के पालनहार माने जाने वाले भगवान विष्णु की हमेशा चार बार परिक्रमा करनी चाहिए. 
  • हिंदू मान्यता के अनुसार भगवान राम और श्रीकृष्ण भगवान विष्णु के ही अवतार हैं, इसलिए इनकी भी चार बार ही परिक्रमा करनी चाहिए. 
  • हिंदू मान्यता के अनुसार प्रतिदिन प्रत्यक्ष दर्शन देने वाले भगवान सूर्य की सात बार परिक्रमा लगानी चाहिए
  • देवों के देव कहलाने वाले महादेव की पूजा के दौरान उनकी सिर्फ आधी परिक्रमा करने का विधान है. 
  • रामभक्त हनुमान का आशीर्वाद पाने के लिए हनुमत साधक को उनकी तीन बार परिक्रमा लगानी चाहिए. 
  • जिस शक्ति के बगैर शिव अधूरे माने जाते हैं, उस देवी दुर्गा की परिक्रमा सिर्फ एक बार करनी चाहिए. 
  • हिंदू मान्यता के अनुसार पीपल देवता की हमेशा विषम संख्या में परिक्रमा करनी चाहिए. ऐसे मे आप अपने सामर्थ्य के अनुसार पीपल देवता की 1, 3, 5, 7, 9, या 11 या फिर 108 बार परिक्रमा कर सकते हैं. 
  • हिंदू मान्यता के अनुसार किसी यज्ञ कुंड की तीन बार परिक्रमा लगानी चाहिए. 

ईश्वर की परिक्रमा के नियम 

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  • हिंदू मान्यता के अनुसार किसी भी देवी-देवता या फिर मंदिर आदि की उलटी परिक्रमा नहीं करनी चाहिए, अन्यथा उससे पुण्य की जगह दोष लगता है. 
  • हिंदू मान्यता के अनुसार शिवलिंग की कभी पूरी परिक्रमा नहीं करनी चाहिए. साधक को जलहरी को डांके बगैर वापस लौट आना चाहिए. हिंदू मान्यता के अनुसार शिवलिंग की आधी परिक्रमा करने मात्र से ही पुण्यफल प्राप्त हो जाता है. 
  • यदि आप किसी कारणवश मंदिर या तीर्थ स्थान की पूरी परिक्रमा न कर सकें तो आप अपने स्थान पर ही आस्था के साथ चारों तरफ घूम जाइए. पूजा के इस उपाय से आपको संबंधित देवी या देवता की परिक्रमा का पुण्यफल प्राप्त हो जाएगा. 
  • हिंदू मान्यता के अनुसार परिक्रमा करते समय भगवान या मंदिर हमेशा आपके दाईं तरफ रहें. यानि आपको हमेशा हमेशा घड़ी की सुई की दिशा में परिक्रमा करना चाहिए. 
  • यदि संभव हो तो अपने आराध्य की परिक्रमा नंगे पैर, शांत मन और पूरी श्रद्धा के साथ करनी चाहिए. परिक्रमा के दौरान अपने आराध्य देवता के मंत्र का जप या जयकारे लगाते चलें. परिक्रमा के दौरान बातचीत नहीं करना चाहिए.
  • हिंदू मान्यता के अनुसार परिक्रमा के दौरान व्यक्ति को अपने मन में नकारात्मक विचार नहीं लाना चाहिए. 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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