पितृपक्ष को पितरों को याद करने और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का समय माना जाता है. इस दौरान श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे धार्मिक कर्म किए जाते हैं. साथ ही खान-पान और रोजमर्रा के कुछ कामों को लेकर भी कई मान्यताएं हैं. इन्हीं में से एक है पितृपक्ष में बाल और दाढ़ी न बनवाने की परंपरा. आचार्य मदन मोहन के अनुसार, धर्म सिंधु में श्राद्ध के दिन क्षौर कर्म यानी बाल-दाढ़ी काटने से बचने की बात कही गई है. हालांकि, अलग-अलग परंपराओं में नियमों को मानने का तरीका अलग हो सकता है.
क्या पितृपक्ष में मना है बाल कटवाना?
धार्मिक मान्यता के अनुसार पितृपक्ष में जिस दिन श्राद्ध किया जा रहा हो, उस दिन बाल या दाढ़ी कटवाने से बचना चाहिए. धर्म सिंधु में इस संबंध में एक श्लोक का उल्लेख मिलता है. इसका भावार्थ है कि श्राद्ध के दिन क्षौर कर्म नहीं करना चाहिए. इसी मान्यता के चलते कई परिवारों में पूरे पितृपक्ष के दौरान बाल-दाढ़ी नहीं कटवाने की परंपरा है.
-
पीएम मोदी के ग्लोबल विजन से लेकर RBI गवर्नर के बड़े बयान तक, अखबारों के फ्रंट पेज पर छाया NDTV समिट -
'भारतीय दयालु, ईमानदार और बुद्धिमान होते हैं', खामेनेई ने अपने प्रतिनिधि को भारत भेजते समय क्या कहा था? -
NDTV WORLD SUMMIT 2026 : कृति सेनन को बिकिनी सीन करने में क्यों लगे 12 साल? -
ब्रिटेन के हरियाणवी मेयर तुषार कुमार ने बताया कैसे गरीबों की मदद ने जिताया चुनाव -
टैक्स सिर्फ कमाई पर लगे, पूरी रकम पर नहीं..."F&O ट्रेडर्स के नुकसान पर बोले Zerodha को-फाउंडर निखिल कामत -
जिस शशि थरूर को सुनती है पूरी दुनिया, संसद में वह किसे सुनना पसंद करते हैं? खुद खोला राज -
AI से बुलेट ट्रेन तक... अश्विनी वैष्णव ने बताया भारत का फ्यूचर प्लान -
NDTV World Summit 2026: वेजिटेरियन खिलाड़ियों को कौन सी दिक्कतें होती हैं? Savita, Neeru ने बताया -
NDTV World Summit 2026 के मंच पर भारत की 'गोल्डन गर्ल्स' ने बताया जीत का मंत्रा! | Asian Games 2026 -
NDTV World Summit 2026: Lovlina Borgohain ने बताया जीवन का सबसे बड़ा चैलेंज! क्यों लगने लगे ठहाके?
पितरों से जुड़ी है ये मान्यता
आचार्य मदन मोहन के अनुसार, धार्मिक ग्रंथ में श्राद्ध के दिन क्षौर कर्म से बचने की बात कही गई है. लोकमान्यता में यह भी कहा जाता है कि श्राद्ध के दिन कटे हुए बाल पितरों तक पहुंचते हैं और इससे वे नाराज हो सकते हैं. हालांकि, इसे धार्मिक मान्यता के रूप में ही देखाा जाना चाहिए.
ये भी पढ़ें- क्या महिलाएं पीरियड्स में नवरात्रि व्रत रख सकती हैं? जानिए सही नियम और महत्व
पितृपक्ष में किन कामों से बचते हैं?
बाल और दाढ़ी के अलावा कई परिवार पितृपक्ष में नाखून काटने से भी बचते हैं. इस दौरान विवाह, सगाई, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे मांगलिक संस्कार न करने की परंपराा है. नई दुकान या कारोबार शुरू करने से भी कई लोग परहेज करते हैं. खान-पान में सात्विक भोजन रखने की परंपरा भी प्रचलित है.
कब खत्म होगा पितृपक्ष 2026?
इस साल पितृपक्ष 26 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026 तक रहेगा. 5 अक्टूबर को दशमी, 6 अक्टूबर को एकादशी, 7 अक्टूबर को द्वादशी और मघा श्राद्ध, 8 अक्टूबर को त्रयोदशी और 9 अक्टूबर को चतुर्दशी का श्राद्ध होगा. 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ पितृपक्ष का समापन होगा. धार्मिक मान्यताओं का पालन परिवार और परंपरा के अनुसार किया जााता है. ऐसे में किसी विशेष कर्म या श्राद्ध की स्थिति में अपने परिवार की परंपरा और स्थानीय विद्वान की सलाह को प्राथमिकता देना बेहतर मााना जाता है.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं