ज्योतिष शास्त्र में राहु और केतु को छाया ग्रह माना गया है. ऐसी मान्यता है कि कुंडली में इनका अशुभ प्रभाव होने पर व्यक्ति को मानसिक तनाव, आर्थिक परेशानियां, निर्णय लेने में कठिनाई और काम में रुकावट जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल पांडेय ने बताया कि रत्न शास्त्र में ऐसे प्रभावों को कम करने के लिए दो खास रत्नों गोमेद और लहसुनिया का उल्लेख मिलता है.
राहु के लिए गोमेद रत्न
ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल पांडेय ने बताया कि रत्न शास्त्र में गोमेद राहु का प्रमुख रत्न माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इसे धारण करने से मन की उलझनन कम होती है, आत्मविश्वास बढ़ता है और सही निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है. साथ ही राहु से जुड़ी बाधाओं में राहत मिलने की मान्यता है.
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केतु के लिए लहसुनिया
उन्होंने बताया कि लहसुनिया को केतु का रत्न माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि यह नकारात्मक ऊर्जा के प्रभावव को कम करने, मानसिक एकाग्रता बढ़ाने और अचानक होने वाले नुकसान से बचाव में सहायक हो सकता है.
राहु-केतु के अशुभ प्रभाव
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार राहु के अशुभ प्रभाव से भ्रम, डर, ओवरथिंकिंग और अचाानक खर्च बढ़ सकते हैं. वहीं केतु के प्रभाव से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां, एकाग्रता की कमी और अकेलेपन की भावना बढ़ सकती है.
रत्न पहनने से पहले रखें ये बात याद
ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल पांडेय के अनुसार, गोमेद और लहसुनिया को आमतौर पर चांदी या पंचधातु में धारण किया जाता है. इन्हें पहनने से पहले शुद्धीकरण करना और योग्य ज्योतिषी की सलाह लेना जरूरी माना जाता है. साथ ही राहु-केतु के मंत्रों का जाप करने की भी परंपरा बताई गई है.
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