सावन शिवरात्रि भगवान शिव को समर्पित बेहद खास रात मानी जाती है. इस दिन भक्त व्रत रखते हैं और शिवलिंग का अभिषेक करने के साथ रात में पूजा-पाठ करते हैं. ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल रहता है कि सावन शिवरात्रि की रात सोना चाहिए या पूरी रात जागना जरूरी है. ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल पांडेय के अनुसार, ऐसी धार्मिक मान्यता है कि इस रात जागकर भगवान शिव का ध्यान और पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है.
क्यों रातभर जागते हैं शिव भक्त
ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल पांडेय के अनुसार, हिंदू धर्म में शिवरात्रि की रात को जागरण की परंपरा है. ऐसी मान्यता है कि रात के चारों प्रहर में भगवान शिव की पूजा और अभिषेक करने से भक्त को विशेष आध्यात्मिक लाभ मिलता है. जागरण का मतलब केवल नींद से दूर रहना नहीं, बल्कि अपना मन भगवान शिव की भक्ति में लगाना माना जाता है. इसलिए देश भर के शिव मंदिरों में कावड़ियों की सेवा के साथ जागरण भी होता है.
क्या पूरी रात मना है सोना
ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल पांडेय ने आगे बताया कि शिवरात्रि पर पूरी रात जागना धार्मिक साधना का हिस्सा माना जाता है, लेकिन हर व्यक्ति के लिए पूरी रात जागना ठीक नही है. जो लोग स्वास्थ्य या किसी अन्य कारण से जागरण नहीं कर सकते हैं, वे अपनी जरूरत के हिसाब से पूजा और ध्यान कर सकते हैं.
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जागरण के पीछे क्या है मान्यता
उन्होंने बताया कि धार्मिक मान्यता में शिवरात्रि की रात को आत्मचिंतन, ध्यान और साधना के लिए खास माना गया है. इस दौरान भक्त मंत्र जाप, शिव चालीसा, महामृत्युंजय मंत्र और भगवान शिव का ध्यान करते हैं. इससे मन को शांति मिलती है.
सावन शिवरात्रि पर करें क्या
बता दें कि इस दिन स्नान के बाद भगवान शिव की पूजा करें. शिवलिंग पर जल अर्पित करें और अपनी श्रद्धा के अनुसार बेलपत्र, धतूरा आदि चढ़ाएं. रात में संभव हो तो चारों प्रहर में पूजा करें.
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