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2 या 3 मार्च कब मनाएं पूर्णिमा? ज्योतिषाचार्य ने ग्रहण और होली को लेकर कन्फ्यूजन किया दूर

मार्च की शुरुआत में ही तिथि, ग्रहण और होली को लेकर हलचल मची हुई है. कोई कह रहा है 2 मार्च को पूर्णिमा, तो कोई 3 मार्च बता रहा है. ऊपर से ग्रहण और सूतक का साया. ऐसे में आम लोग सोच में हैं कि आखिर सही दिन कौन सा है.

2 या 3 मार्च कब मनाएं पूर्णिमा? ज्योतिषाचार्य ने ग्रहण और होली को लेकर कन्फ्यूजन किया दूर
पूर्णिमा और ग्रहण साथ-साथ...जानिए कब करें स्नान दान और होलिका दहन

Holi 2026 Date: त्योहारों का मौसम हो और पंचांग में हल्का सा फेरबदल हो जाए, तो उलझन होना लाजमी है. इस बार 2 और 3 मार्च को लेकर कन्फ्यूजन इसलिए बढ़ रहा है...क्योंकि पूर्णिमा की तिथि, ग्रहण और होली तीनों साथ पड़ रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय ज्योतिषाचार्य डॉ. गौरव कुमार दीक्षित ने इस पूरे मामले को आसान शब्दों में समझाया है, ताकि लोग सही समय पर स्नान, दान और पूजा कर सकें.

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2 मार्च को पूर्णिमा व्रत और चंद्र अर्घ्य (Purnima Vrat and Moon Offering on 2 March)

डॉ. गौरव कुमार दीक्षित के अनुसार, 2 मार्च की शाम को पूर्णिमा तिथि लग जाएगी. जो लोग पूर्णिमा का व्रत रखते हैं, वे रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देंगे और दीप जलाकर पूजा करेंगे. ऐसे श्रद्धालु 2 तारीख को ही पूर्णिमा मानेंगे. हालांकि, जो लोग गंगा स्नान या दान पुण्य की परंपरा निभाते हैं, वे सुबह के समय यह कर्म करते हैं, इसलिए उनके लिए 3 मार्च की सुबह पूर्णिमा का स्नान और दान मान्य रहेगा.

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3 मार्च को ग्रहण और सूतक का प्रभाव (Eclipse and Sutak Effect on 3 March)

3 मार्च को ग्रहण भी पड़ रहा है और सूतक काल लागू होगा, इसलिए ज्योतिषाचार्य के अनुसार सूतक शुरू होने से पहले ही स्नान और दान कर लेना उचित रहेगा. ग्रहणकाल में होली में अग्नि नहीं जलाई जाती. ऐसे में लोग या तो 2 मार्च की रात को होलिका दहन करेंगे या 3 मार्च को सूतक लगने से पहले. रंग खेलने की बात करें तो सूतक में रंग नहीं खेला जाता, इसलिए रंगों की होली 4 मार्च को खेली जाएगी.

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Photo Credit: File Photo

क्यों जरूरी है सही जानकारी (Why This Information Is Important)

तिथि और ग्रहण से जुड़े नियम धार्मिक आस्था से सीधे जुड़े होते हैं. सही समय की जानकारी से लोग बिना भ्रम के अपने संस्कार निभा सकते हैं. इस बार 2 और 3 मार्च दोनों ही खास हैं, बस कर्म के अनुसार, दिन तय होगा. सही समय पर पूजा, स्नान और होली मनाकर ही त्योहार की असली रौनक बनी रहती है.

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