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Pradosh Vrat 2026: ज्येष्ठ अधिक का प्रदोष व्रत आज, जान लें पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

आज ज्येष्ठ अधिक मास का गुरु प्रदोष व्रत रखा जाएगा. जानिए पूजा का शुभ समय, आसान पूजा विधि और इस व्रत का महत्व.

Pradosh Vrat 2026: ज्येष्ठ अधिक का प्रदोष व्रत आज, जान लें पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व
प्रदोष व्रत पर जरूर करें यह कार्य.
फाइल फोटो

Guru Pradosh Vrat 2026 : भगवान शिव की पूजा करने वालों के लिए आज का दिन बेहद खास माना जा रहा है, क्योंकि आज ज्येष्ठ अधिक मास का गुरु प्रदोष व्रत रखा जा रहा है. मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से भोलेनाथ की पूजा करने से जीवन की परेशानियां कम होती हैं और घर में सुख-शांति बनी रहती है. इस बार प्रदोष व्रत गुरुवार को पड़ रहा है, इसलिए इसका महत्व और भी बढ़ गया है. कहा जाता है कि गुरु प्रदोष के दिन भगवान शिव के साथ भगवान विष्णु की पूजा करने से भी शुभ फल मिलता है. ऐसे में अगर आप भी आज व्रत रखने वाले हैं तो पूजा का सही समय और आसान विधि जरूर जान लें.

आज कब रखा जाएगा प्रदोष व्रत

पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 28 मई की सुबह 7 बजकर 58 मिनट से शुरू होगी. वहीं ये तिथि 29 मई की सुबह 9 बजकर 51 मिनट तक रहेगी. प्रदोष काल को देखते हुए ये व्रत आज यानी 28 मई, गुरुवार को रखा जाएगा. गुरुवार के दिन पड़ने की वजह से इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाता है.

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पूजा का शुभ समय

आज शाम 6 बजकर 12 मिनट से रात 7 बजकर 57 मिनट तक पूजा का शुभ समय रहेगा. मान्यता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करने से विशेष फल मिलता है. इसी समय भोलेनाथ का अभिषेक और पूजा करना शुभ माना जाता है.

आसान पूजा विधि

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें.
  • इसके बाद भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें.
  • घर के मंदिर को साफ करके शिवजी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें.
  • पूजा में घी का दीपक जलाएं और बेलपत्र, फूल, चंदन और धूप अर्पित करें.
  • शाम को शिव मंदिर जाकर भगवान शिव का जल, दूध, दही और शहद से अभिषेक करें.
  • इसके बाद शिव मंत्रों का जाप करें और आरती करें. पूजा के आखिर में प्रसाद बांटें.
  • आज गुरु प्रदोष होने की वजह से भगवान विष्णु के सामने भी दीपक जलाना शुभ माना गया है.

क्या है प्रदोष व्रत का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, प्रदोष व्रत करने से भगवान शिव की कृपा बनी रहती है. कहा जाता है कि ये व्रत दुखों को दूर करने और मनोकामनाएं पूरी करने में मदद करता है. यही वजह है कि बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस दिन व्रत और पूजा करते हैं.

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