पितृ पक्ष को हिंदू धर्म में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और उन्हें याद करने का समय माना जाता है. इस दौरान पिंडदान, तर्पण, श्राद्ध और ब्राह्मण भोज जैसे कर्म किए जाते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे मांगलिक कार्यों से बचना चाहिए. इसी तरह इस अवधि में कुछ नई चीजों की खरीदारी भी शुभ नहीं मानी जाती है. आचार्य मदन मोहन ने बताया कि पितृ पक्ष संयम और सादगी का समय है. इसलिए इस दौरान भौतिक सुख-सुविधाओं से जुड़ी नई चीजें खरीदने से बचने की परंपरा है.
नए कपड़े और गहने खरीदने से बचें
आचार्य मदन मोहन ने बताया कि पितृ पक्ष में अपने इस्तेमाल के लिए नए कपड़े, सोने-चांदी के आभूषण और फैशन से जुड़ी चीजें खरीदना धार्मिक मान्यताओं में उचित नहीं माना जाता है. हालांकि, श्राद्ध, दान-पुण्य या जरूरतमंदों की मदद के लिए खरीदी गई वस्तुओं को इस मनाही में शामिल नहीं किया जाता. साथ ही आप नई कार, बाइक, घर या जमीन खरीदने से भी पितृ पक्ष के दौरान बचने की सलाह दी जाती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, ऐसी खरीदारी को नए और शुभ कार्य की शुरुआत माना जाता है जबकि पितृ पक्ष पूर्वजों के स्मरण और तर्पण का समय होता है.
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नई झाड़ू खरीदने की भी मान्यता
झाड़ू को धार्मिक परंपराओं में मां लक्ष्मी से जोड़ा जाता है. आचार्य मदन मोहन के अनुसार, पितृ पक्ष में नई झाड़ू खरीदने से बचने की मान्यता है. इसे आर्थिक स्थिति से जोड़कर भी देखा जाता है. इसके अलावा, श्राद्ध पक्ष में नयाा नमक खरीदने के साथ ही नमक उधार देने या लेने से बचने की सलााह दी जाती है. इसी तरह सरसों के तेल को भी इस दौरान खरीदकर घर लाने से बचने की धार्मिक मान्यता बताई जाती है.
इलेक्ट्रॉनिक्स और फर्नीचर की खरीदारी
पितृ पक्ष में नया टीवी, फ्रिज, सोफा, बेड या घर की सजावट का सामान खरीदना भी शुभ नहीं माना जाता है. धार्मिक परंपरा में इस अवधि को उत्सव और भौतिक खरीदारी के बजाय साादगी, श्रद्धा और पूर्वजों के स्मरण का समय माना गया है.
26 सितंबर से शुरू होगा पितृ पक्ष
आचार्य मदन मोहन ने बताया कि 26 सितंबर 2026 को पूर्णिमा श्राद्ध के साथ पितृ पक्ष की शुरुआात होगी और 10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या के साथ इसकाा समापन होगा. इस दौरान लोग अपने पितरों की तिथि के अनुसार श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं.
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