कैप्टन स्मित मच्छार फ्लाईएयर की फ्लाइट संख्या FZ073 के पायलट थे. उनके ही को-पायलट ने उन पर हमला कर दिया और वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे. इसके बावजूद उन्होंने विमान को क्रैश होने से बचाने के लिए कॉकपिट का दरवाजा खोला और मदद के लिए आवाज लगाई. इससे यात्रियों ने हमलावर को-पायलट को काबू करने का मौका मिल गया और एक बड़ी दुर्घटना होते-होते बच गई. इस बारे में पायलट स्मित मच्छार ने बताया कि इस हमले के बीच उन्हें कैसे हिम्मत मिली. उन्होंने कहा, 'उस दौरान मैं हनुमान चालीसा पढ़ता रहा. भगवान हनुमान ने मुझे हिम्मत और हौसला दिया. इससे पहले भी नेपाल में विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के दौरान मजदूर मलबे में फंस गए और कई दिन बाद उन्हें जिंदा निकाला गया. इस दौरान भी मजदूर ने कहा था कि वह मंत्र का जाप कर रहा था.
इन सब के बीच नीम करोली बाबा पर बनी हनुमान अंश फिल्म में भी हनुमान चालीसा का बहुत ही खास और गहरा महत्व बताया गया है. चलिए आपको बताते हैं संकट के समय में हनुमान चालीसा कैसे शक्ति, हौसला और साहस बढ़ाने का काम करती है.
हनुमान चालीसा की शक्ति
आचार्य मदन मोहन के मुताबिक, जब हमारी लाइफ में कोई छोटी या बड़ी परेशानी, दुख या संकट आता है, तो सबसे पहले हमें हनुमान जी की याद आती है. हम तुरंत उनका नाम जपने लगते हैं और उनसे सब सही कर देने की प्रार्थना करते हैं, यही कारण है कि हनुमान जी को संकट मोचन कहा जाता है यानी सभी संकटों को दूर करने वाले देवता. हनुमान जी की स्तुति और चौपाइयों का पाठ मन को साहस, शक्ति और शांति देता है. माना जाता है कि इन चौपाइयों में ऐसी दिव्य शक्ति होती है, जो व्यक्ति के मन का डर और चिंता कम कर सकती है.
आचार्य ने बताया कि रामायण में भी हनुमान जी ने कई ऐसे कार्य किए, जिन्हें असंभव माना जाता था. अपनी भक्ति, पराक्रम और समर्पण से उन्होंने हर काम को कर दिखाया. इसलिए लोगों के मन में यह अटूट विश्वास है कि हनुमान जी का स्मरण करने से संकटों का सामना करने की शक्ति मिलती है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं.
गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस में हनुमान जी का वर्णन बहुत सरल और प्रेरणादायक शब्दों में किया गया है. उनकी चौपाइयां और स्तुति अक्सर ऐसे समय में अपने आप ही याद आ जाती हैं, जब व्यक्ति घबराहट, भय या अनिश्चितता का सामना कर रहा हो. हनुमान जी का नाम जपने से मन में साहस, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.
हनुमान चालीसा | Hanuman Chalisa
श्रीगुरु चरन सरोज रज , निजमन मुकुरु सुधारि।
बरनउं रघुबर बिमल जसु, जो दायक फल चारि।।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।
राम दूत अतुलित बल धामा।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।
महाबीर बिक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी।।
कंचन बरन बिराज सुबेसा।
कानन कुण्डल कुँचित केसा।।
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजे।
कांधे मूंज जनेउ साजे।।
शंकर सुवन केसरी नंदन।
तेज प्रताप महा जग वंदन।।
विद्यावान गुनी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर।।
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया।।
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
बिकट रूप धरि लंक जरावा।।
भीम रूप धरि असुर संहारे।
रामचन्द्र के काज संवारे।।
लाय सजीवन लखन जियाये।
श्री रघुबीर हरषि उर लाये।।
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं।।
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
नारद सारद सहित अहीसा।।
जम कुबेर दिगपाल जहां ते।
कबि कोबिद कहि सके कहां ते।।
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राज पद दीन्हा।।
तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना।
लंकेश्वर भए सब जग जाना।।
जुग सहस्र जोजन पर भानु।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।।
दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।
राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।
सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रच्छक काहू को डर ना।।
आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हांक तें कांपै।।
भूतपिसाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै।।
नासै रोग हरे सब पीरा।
जपत निरन्तर हनुमत बीरा।।
संकट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।
सब पर राम तपस्वी राजा।
तिन के काज सकल तुम साजा।।
और मनोरथ जो कोई लावै।
सोई अमित जीवन फल पावै।।
चारों जुग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा।।
साधु संत के तुम रखवारे।।
असुर निकन्दन राम दुलारे।।
अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता।
अस बर दीन जानकी माता।।
राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा।।
तुह्मरे भजन राम को पावै।
जनम जनम के दुख बिसरावै।।
अंत काल रघुबर पुर जाई।
जहां जन्म हरिभक्त कहाई।।
और देवता चित्त न धरई।
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।।
संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।
जय जय जय हनुमान गोसाईं।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।
जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहि बन्दि महा सुख होई।।
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा।।
तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय महं डेरा।।
दोहा
पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।
पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥
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