Phulera Dooj 2026 Vrat Katha: आज यानी 19 फरवरी 2026 को पूरे देशभर में फुलेरा दूज का पावन पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह दिन भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी के प्रेम को समर्पित होता है. साथ ही इस दिन से ब्रज में होली की शुरुआत हो जाती है. इसके अलावा इस दिन भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी की पूजा करना भी बेहद फलदायी माना जाता है. साथ ही व्रत कथा का पाठ करने या सुनने से भगवान अपनी विशेष कृपा बनाए रखते हैं और दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है. आइए जानते हैं फुलेरा दूज की पौराणिक व्रत कथा...

फुलेरा दूज व्रत कथा (Phulera Dooj Vrat Katha in Hindi)
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी के बीच लंबे समय तक मिलन नहीं हुआ. इस दूरी के कारण राधा रानी अत्यंत उदास हो गईं. उनके मन की उदासी का असर पूरे वृंदावन पर पड़ा. वहां खिले हुए सभी फूल मुरझा गए, वृक्ष सूखने लगे, और डालियां भी टूटकर बिखरने लगीं. पक्षियों ने चहचहाना बंद कर दिया और नदी की बहती धारा मानो ठहर सी गई. पूरे वृंदावन पर गहरी उदासी छा गई थी. यह सब केवल इसलिए हो रहा था, क्योंकि राधा रानी को श्रीकृष्ण के दर्शन नहीं हो पा रहे थे. राधा रानी का दुख देखकर सभी गोपियां भी अत्यंत उदास हो गईं. राधा रानी बस श्रीकृष्ण के मिलने की उम्मीद में इंतजार करती रहती थीं. उन्होंने खाना-पीना छोड़ दिया.
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जब भगवान श्रीकृष्ण ने वृंदावन में फैली इस गहरी उदासी को देखा, तो उन्हें एहसास हुआ कि इसका कारण राधा रानी का दुख है. राधा रानी श्रीकृष्ण को पुकार रही थीं और उनके विरह में अत्यंत उदास थीं, जिससे पूरा वृंदावन सूना पड़ा था. यह स्थिति देखकर भगवान श्री कृष्ण तुरंत वृंदावन पहुंचे, ताकि वे राधा रानी से मिल सकें. जैसे ही राधा रानी को कान्हा के आगमन का समाचार मिला. उनके चेहरे पर तुरंत मुस्कान खिल उठी.
जैसे ही श्रीकृष्ण वृंदावन पहुंचे, उसी क्षण सभी पेड़-पौधे फिर से हरे-भरे हो गए, मुरझाए हुए फूल खिल उठे और पक्षियों ने मधुर स्वर में चहचहाना शुरू कर दिया. गोपियां भी आनंद से झूम उठीं. जब भगवान श्रीकृष्ण ने राधा रानी से मिलन किया, तो राधा जी की खुशी का ठिकाना न रहा. कान्हा ने मुस्कुराते हुए फूल तोड़े और राधा रानी पर बरसाने लगे. यह देखकर राधा जी भी प्रेमपूर्वक कान्हा पर फूल बरसाने लगीं. धीरे-धीरे सभी ग्वाले और गोपियां भी इस आनंद में शामिल हो गए और एक-दूसरे पर फूल फेंकने लगे. इस तरह पूरे वृंदावन में हर्ष और उल्लास के साथ फूलों की होली खेली गई. तभी से इस दिन को फुलेरा दूज कहा जाने लगा और ब्रज में होली का प्रारंभिक उत्सव भी इसी दिन मनाया जाता है.
फुलेरा दूज 2026 तिथि (Phulera Dooj 2026 Tithi)
पंचांग के अनुसार फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि की शुरुआत 18 फरवरी को शाम 4 बजकर 57 मिनट पर हो गई है. वहीं, इसका समापन 19 यानी आज फरवरी को दोपहर 3 बजकर 58 मिनट पर होगा. ऐसे में फुलेरा दूज 19 फरवरी दिन गुरुवार को मनाया जा रहा है.
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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