भगवान शिव की पूजा को हिंदू धर्म में सुख-शांति और मनोकामना पूर्ति से जोड़कर देखा जाता है. संतान की कामना रखने वाले दंपती भी भगवान शिव की विशेष पूजा करते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, पार्थिव शिवलिंग बनाकर विधि-विधान से पूजा और अभिषेक करने से भोलेनाथ की कृपा प्राप्त होती है. आइए ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल पांडेय से जानिए इस पूजा से जुड़ी मान्यताएं और विधि.
कैसे बनाएं पार्थिव शिवलिंग
ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल पांडेय के अनुसार, ऐसी मान्यता है कि पति-पत्नी सुबह स्नान आदि करने के बाद श्रद्धा के साथ पूजा शुरू कर सकते हैं. पार्थिव शिवलिंग बनाने के लिए गंगा की मिट्टी का इस्तेमाल किया जाता है. इसके अलावा गेहूं के आटे से भी 11 शिवलिंग बनााने की परंपरा बताई गई है.
ऐसे करें भगवान शिव की पूजा
शिवलिंग तैयार करने के बाद भगवान शिव को गंध, अक्षत, बेलपत्र और धतूरा अर्पित किया जाता है. इसके बाद जल से अभिषेक करर भगवान शिव का ध्यान और ‘ॐ नमः शिवाय' का जाप किया जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, पूजा के दौरान मन को शांत और श्रद्धा को बनाए रखना महत्वपूर्ण माना जाता है.
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21 दिन तक पूजा करने की मान्यता
जानकारी के अनुसार, संतान की कामना से यह धार्मिक अनुष्ठान कम से कम 21 दिनों तक श्रद्धा और नियमम के साथ करने की मान्यता है. हालांकि, इसे संतान प्राप्ति की गारंटी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए.
कितने बनाए जाते हैं पार्थिव शिवलिंग
पंडित जी ने बतया कि धार्मिक परंपराओं में अलग-अलग उद्देश्यों के लिए पार्थिव शिवलिंग की संख्या अलग बताई गई है. नियमित पूजा के लिए 11, 28 या 108 और विशेष अनुष्ठान में 1100, 11000 या सवा लाख पार्थिव शिवलिंग बनाने का उल्लेख मिलता है. बड़े अनुष्ठान में हवन, तर्पण और मार्जन भी किया जाता है.
पूजा के दौरान रखें इन बातों का ध्यान
पूजा से पहले और अभिषेक तक भस्म-रुद्राक्ष धारण करने तथा मानसिक रूप से ‘ॐ नमः शिवाय' का जाप करने की परंपरा बताई गई है. पूजा की पूरी विधि किसी योग्य आचार्य या कर्मकांड विशेषज्ञ की सलाह से करना बेहतर माना जाता है.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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