विश्व के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में शामिल नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेला 2027 का बहुप्रतीक्षित शेड्यूल जारी कर दिया गया है. इस कार्यक्रम के साथ ही करोड़ों श्रद्धालुओं का इंतजार भी खत्म हो गया है. कुंभ मेले में शामिल होने के लिए देश ही नहीं बल्कि दुनिया के विभिन्न देशों से श्रद्धालु, साधु-संत और पर्यटक नासिक पहुंचेंगे. प्रशासन भी इस विशाल आयोजन की तैयारियों में युद्धस्तर पर जुटा हुआ है.
2026 के अंतिम महीनों से होगी शुरुआत
इस बार कुंभ मेले की शुरुआत वर्ष 2026 के अंतिम महीनों से होगी, जबकि मुख्य धार्मिक आयोजन और अमृत स्नान वर्ष 2027 में आयोजित किए जाएंगे. पूरे आयोजन का समापन 24 जुलाई 2028 को होगा. लगभग दो वर्षों तक चलने वाले इस धार्मिक महापर्व में करोड़ों श्रद्धालु गोदावरी के पावन तट पर आस्था की डुबकी लगाएंगे.

ध्वजारोहण से होगी कुंभ की शुरुआत
कुंभ मेले का औपचारिक शुभारंभ 31 अक्टूबर 2026 को ध्वजारोहण के साथ होगा. इसी दिन से अखाड़ों की धार्मिक गतिविधियां और विभिन्न आयोजन प्रारंभ हो जाएंगे. इसके बाद पूरे कुंभ क्षेत्र में आध्यात्मिक और धार्मिक वातावरण देखने को मिलेगा.
नगर प्रदक्षिणा से बढ़ेगा धार्मिक उत्साह
29 जुलाई 2027 को नगर प्रदक्षिणा निकाली जाएगी. इस दौरान विभिन्न अखाड़ों के संत-महात्मा पारंपरिक शाही स्वरूप में नगर भ्रमण करेंगे. यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होता है.
कब-कब होंगे अमृत स्नान?
कुंभ मेले का सबसे महत्वपूर्ण आकर्षण अमृत स्नान होता है. इन शुभ तिथियों पर लाखों नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालु पवित्र गोदावरी में स्नान कर पुण्य अर्जित करेंगे.
- पहला अमृत स्नान: 2 अगस्त 2027
- दूसरा अमृत स्नान: 31 अगस्त 2027
- तीसरा अमृत स्नान (नासिक): 11 सितंबर 2027
- तीसरा अमृत स्नान (त्र्यंबकेश्वर): 12 सितंबर 2027
- 24 जुलाई 2028 को होगा समापन
करीब दो सालों तक चलने वाले इस भव्य आयोजन का समापन 24 जुलाई 2028 को होगा. समापन समारोह के साथ सिंहस्थ कुंभ मेले का विधिवत समापन किया जाएगा.

करोड़ों श्रद्धालुओं के आने की संभावना
नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेले में इस बार देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है. श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सड़क, रेल, हवाई संपर्क, पार्किंग, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं, सुरक्षा व्यवस्था, ट्रैफिक प्रबंधन और स्वच्छता जैसे सभी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर तैयारियां की जा रही हैं. महाराष्ट्र सरकार और स्थानीय प्रशासन इस आयोजन को सफल बनाने के लिए कई विकास परियोजनाओं पर तेजी से काम कर रहे हैं.
नासिक और त्र्यंबकेश्वर का धार्मिक महत्व
नासिक और त्र्यंबकेश्वर हिंदू धर्म के सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में गिने जाते हैं. मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान अमृत कलश से गिरी बूंदों के कारण यह स्थान कुंभ मेले के चार प्रमुख स्थलों में शामिल हुआ. गोदावरी नदी में स्नान, भगवान त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन और संतों के सान्निध्य को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है. इसी वजह से हर सिंहस्थ कुंभ में करोड़ों श्रद्धालु यहां पहुंचकर आस्था की पवित्र डुबकी लगाते हैं.
नासिक कुंभ मेला 2027: पूरा शेड्यूल
- ध्वजारोहण: 31 अक्टूबर 2026
- नगर प्रदक्षिणा: 29 जुलाई 2027
- पहला अमृत स्नान: 2 अगस्त 2027
- दूसरा अमृत स्नान: 31 अगस्त 2027
- तीसरा अमृत स्नान (नासिक): 11 सितंबर 2027
- तीसरा अमृत स्नान (त्र्यंबकेश्वर): 12 सितंबर 2027
- समापन समारोह: 24 जुलाई 2028
नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेला 2027 केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक परंपरा और सनातन आस्था का सबसे बड़ा महापर्व माना जाता है. आगामी कुंभ मेले में एक बार फिर नासिक और त्र्यंबकेश्वर पूरी दुनिया की आस्था का केंद्र बनने जा रहे हैं.
(राहुल वाघ की रिपोर्ट)
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