Kalashtami April 2026: कालाष्टमी हिंदू धर्म का एक बहुत ही शक्तिशाली और पवित्र दिन माना जाता है. कालाष्टमी पर भगवान शिव के रौद्र अवतार कालभैरव की पूजा शत्रुओं के नाश, भय मुक्ति और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए की जाती है. मासिक कालाष्टमी हर माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी पर विशेष पूजा से राहु-केतु का दोष शांत होता है. आज यानी 10 अप्रैल को कालाष्टमी का व्रत रखा जाएगा. कालाष्टमी पर काल भैरव की पूजा और काल भैरव अष्टक का पाठ करना अत्यंत शुभ माना गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सच्चे मन से भैरव बाबा की आराधना और काल भैरव का पाठ करने से भय, शत्रु और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलती है.
काल भैरव अष्टक पाठ
देवराजसेव्यमानपावनांघ्रिपङ्कजं व्यालयज्ञसूत्रमिन्दुशेखरं कृपाकरम्।
नारदादियोगिवृन्दवन्दितं दिगंबरं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे॥
अर्थ- देवराज इंद्र द्वारा सेवित, पवित्र चरण कमल वाले, सर्प के यज्ञोपवीत धारण करने वाले, मस्तक पर चंद्रमा धारण करने वाले, कृपालु, नारद और योगियों द्वारा वंदित, दिगंबर (आकाश को वस्त्र मानने वाले) और काशी के स्वामी कालभैरव को मैं भजता हूं.)
भानुकोटिभास्वरं भवाब्धितारकं परं नीलकण्ठमीप्सितार्थदायकं त्रिलोचनम्।
कालकालमंबुजाक्षमक्षशूलमक्षरं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे॥
अर्थ- करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी, संसार रूपी सागर से तारने वाले, नीलकंठ, मनचाहा फल देने वाले, तीन नेत्र वाले, काल के भी काल, कमल नयन, त्रिशूल धारण करने वाले, अविनाशी और काशी के स्वामी कालभैरव को मैं भजता हूं.
शूलटङ्कपाशदण्डपाणिमादिकारणं श्यामकायमादिदेवमक्षरं निरामयम्।
भीमविक्रमं प्रभुं विचित्रताण्डवप्रियं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे॥
अर्थ- हाथ में त्रिशूल, पाश और डंडा धारण करने वाले, सृष्टि के आदि कारण, श्याम शरीर वाले, आदिदेव, अविनाशी, रोग मुक्त, भीषण पराक्रमी, विचित्र तांडव के प्रेमी और काशी के स्वामी कालभैरव को मैं भजता हूं.
भुक्तिमुक्तिदायकं प्रशस्तचारुविग्रहं भक्तवत्सलं स्थितं समस्तलोकविग्रहम्।
विनिक्वणन्मनोज्ञहेमकिङ्किणीलसत्कटिं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे॥
अर्थ- भोग (सांसारिक सुख) और मुक्ति देने वाले, सुंदर विग्रह वाले, भक्तों को प्यार करने वाले, समस्त लोकों में व्याप्त, कमर में मधुर ध्वनि वाली स्वर्ण करधनी धारण करने वाले और काशी के स्वामी कालभैरव को मैं भजता हूं.
धर्मसेतुपालकं त्वधर्ममार्गनाशकं कर्मपाशमोचकं सुशर्मदायकं विभुम्।
स्वर्णवर्णशेषपाशशोभिताङ्गमण्डलं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे॥
अर्थ- धर्म की रक्षा करने वाले, अधर्म के मार्ग को नष्ट करने वाले, कर्म के पाश से मुक्त करने वाले, परम सुख प्रदान करने वाले, स्वर्ण वर्ण के सर्पों से विभूषित और काशी के स्वामी कालभैरव को मैं भजता हूं.
रत्नपादुकाप्रभाभिरामपादयुग्मकं नित्यमद्वितीयमिष्टदैवतं निरञ्जनम् ।
मृत्युदर्पनाशनं कराळदंष्ट्रमोक्षणं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥
अर्थ- जिनके दोनों चरण रत्नों की पादुकाओं की चमक से सुंदर दिखते हैं, जो नित्य, अद्वितीय और निर्दोष इष्टदेव हैं तथा जो काल के अहंकार का नाश करने वाले हैं, उन काशीपति कालभैरव को मैं भजता हूं.
अट्टहासभिन्नपद्मजाण्डकोशसन्ततिं दृष्टिपातनष्टपापजालमुग्रशासनम् ।
अष्टसिद्धिदायकं कपालमालिकाधरं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥
अर्थ- जिनकी अट्टहास मात्र से ब्रह्मांड कांप उठता है, जिनकी दृष्टि मात्र से पापों का जाल नष्ट हो जाता है और जो अष्ट सिद्धियां प्रदान करने वाले कपालधारी हैं, उन काशीपति कालभैरव को मैं भजता हूं.
भूतसङ्घनायकं विशालकीर्तिदायकं काशिवासलोकपुण्यपापशोधकं विभुम् ।
नीतिमार्गकोविदं पुरातनं जगत्पतिं काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे ॥
अर्थ- जो भूतों के नायक और विशाल कीर्ति देने वाले हैं, जो काशीवासियों के पुण्य-पाप का लेखा-जोखा रखते हैं और जो नीति मार्ग के ज्ञाता तथा जगत के स्वामी हैं, उन काशीपति कालभैरव को मैं भजता हूं.
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