विज्ञापन

Jagannath Rath Yatra 2026: जगन्नाथ मंदिर से जुड़ी 10 बड़ी बातें जिसे सुनकर हर कोई दांतों तले दबा लेता हैं अंगुलियां

Jagannath Mandir Ka Rahasya: प्राचीन सप्तपुरियों में से एक जिस पुरी नगरी को धरती का बैकुंठ कहा जाता है, वहां पर स्थित जगन्नाथ मंदिर का क्या महत्व है? भगवान जगन्नाथ के इस पावन धाम और उनसे जुड़ी यात्रा की रोचक बातों को जानने के लिए जरूर पढ़ें ये लेख. 

Jagannath Rath Yatra 2026: जगन्नाथ मंदिर से जुड़ी 10 बड़ी बातें जिसे सुनकर हर कोई दांतों तले दबा लेता हैं अंगुलियां
Jagannath Temple: भगवान जगन्नाथ के मंदिर का रहस्य क्‍या है?
NDTV

Jagannath Temple Significance: सनातन परंपरा में बद्रीनाथ और द्वारकानाथ की तरह भगवान जगन्नाथ की पूजा का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. भगवान जगन्नाथ का पावन धाम जिसे धरती का बैकुंठ कहा जाता है, वह ओडिशा के पुरी में स्थित है. सात प्राचीन पुरियों में से एक इस पावन धाम में भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ विराजमान हैं. समुद्र के किनारे स्थित हिंदू आस्था से जुड़े इस महाधाम की वास्तुकला ही नहीं बल्कि इससे जुड़े तमाम रोचक रहस्य हैं, जो सदियों से श्रद्धालुओं को दांतो तले अंगुलियां दबाने के लिए मजबूर कर देते हैं. आइए जगन्नाथ मंदिर और इससे जुड़ी पावन रथ यात्रा से जुड़े 10 बड़े रोचक बातों को जानते हैं. 

Latest and Breaking News on NDTV

1. जगन्नाथ मंदिर में लकड़ी से बनी है मूर्तियां

सप्तपुरियों में से एक जगन्नाथ पुरी धाम में भगवान जगन्नाथ जी को भगवान श्री कृष्ण का स्वरूप माना जाता है. यहां पर वे अपनी बहन सुभद्रा और बड़े भाई बलभद्र के साथ मंदिर के गर्भगृह में विराजमान हैं. मंदिर में इन तीनों की मूर्तियां लकड़ी से बनी हुई हैं, जिसे हर 12 साल में बदला जाता है. 

2. भगवान की अधूरी मूर्तियों की होती है पूजा

हिंदू मान्यता के अनुसार राजा इंद्रदयुम्न ने जब भगवान विश्वकर्मा से भगवान जगन्नाथ की मूर्तियों को बनाने का निवेदन किया तो उन्होंने यह शर्त रखी थी कि वे इसे बंद कमरे में बनाएंगे और उसमें कोई भी प्रवेश नहीं करेगा. मान्यता है कि एक दिन राजा इंद्रदयुम्न ने जिज्ञासावश जब कमरे का पट खोल दिया तो भगवान विश्वकर्मा अधूरी मूर्ति को छोड़कर चले गये. तब से लेकर आज तक भगवान जगन्नाथ के साथ भगवन बलभद्र और देवी सुभद्रा की अधूरी मूर्तियां ही पूजी जाती हैं. 

Latest and Breaking News on NDTV

3. भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा

भगवान जगन्नाथ हर साल आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर अपनी बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र के साथ रथ पर सवार होकर बाहर निकलते हैं, जिसे रथ यात्रा के नाम से जाना जाता है. भगवान जगन्नाथ की यह रथ यात्रा उनके मंदिर से प्रारंभ होकर गुंडिचा मंदिर तक जाती है और 9 दिनों बाद वे वापस अपने धाम को लौट आते हैं. 

4. तीनों देवताओं के लिए अलग-अलग होता है रथ 

विश्व प्रसिद्ध पुरी की जगन्नाथ रथयात्रा में तीनों देवताओं के लिए अलग-अलग नाम वाले रथ का हर साल निर्माण होता है. इसमें से भगवान भगवान जगन्नाथ के लिए 16 पहियों वाला नंदीघोष रथ, भगवान बलभद्र के लिए 14 पहियों वाला तालध्वज रथ तो वहीं देवी सुभद्रा के लिए 12 पहियों वाला देवदलन रथ तैयार किया जाता है. 

Latest and Breaking News on NDTV

5. भगवान जगन्नाथ मंदिर का मुकुट है सुदर्शन चक्र

जगन्नाथ मंदिर के शिखर पर लगे सुदर्शन चक्र को इस चमत्कारी मंदिर का मुकुट भी कहा जाता है. इसकी खासियत है कि आप इसे जिस तरफ से देखते हैं, यह आपको अपनी तरफ ही घूमा हुआ नजर आता है. भगवान जगन्नाथ के दर्शन के बाद मंदिर के शिखर पर बने सुदर्शन चक्र का दर्शन अत्यंत ही पुण्यदायी माना गया है. 

6. हवा के विपरीत लहराता है मंदिर का ध्वज

भगवान जगन्नाथ के सुदर्शन चक्र की तरह उसके उपर लहराता हुआ ध्वज भी अपने आप में विशेष महत्व रखता है. भगवान के मंदिर का यह ध्वज प्रतिदिन बदला जाता है और यह परंपरा आज तक नहीं रुकी. मंदिर के ध्वज की सबसे खास बात है कि यह हमेशा हवा के विपरीत लहराता है. 

Latest and Breaking News on NDTV

7. भगवान जगन्नाथ का भोग

भगवान जगन्नाथ मंदिर की तरह उनकी रसोईं भी अपने आप मं खास है. यहां पर प्रतिदिन भगवान के लिए विशेष रूप से तमाम तरह के भोग तैयार कीए जाते हैं, जिसे चढ़ाए जाने के बाद आप मंदिर परिसर में ही प्राप्त कर सकते हैं. 

8. कुछ ऐसे पकता है भगवान जगन्नाथ का भोग 

भगवान जगन्नाथ का भोग बड़ी पवित्रता के साथ प्रतिदिन मिट्टी के बर्तन में पकाया जाता है. मंदिर परिसर में स्थित रसोईं में जिस चूल्हे पर मिट्टी के बर्तन एक ऊपर एक रखे जाते हैं, उसमें आश्चर्यजनक तरीके से सबसे पहले ऊपर वाली मटकी का भोग तो वहीं अंत में नीचे वाली मटकी का भोग पकता है. 

Latest and Breaking News on NDTV

9. कभी कम नहीं पड़ता महाप्रसाद

भगवान जगन्नाथ के लिए जब भोग को रसोई से मंदिर की तरफ ले जाया जाता है तो उसके बीच कोई भी व्यक्ति रास्ते में नहीं आता है. भगवान के महाप्रसाद की खासियत है कि यहां पर जितने भी व्यक्ति आ जाएं यह भोग समाप्त नहीं नहीं होता है. मान्यता है कि जगन्नाथ के धाम पर मां अन्नपूर्णा और मां लक्ष्मी की हर पल विशेष कृपा बरसती है. खास बात यह भी कि यहां पर कभी भी खाना बचता भी नहीं है. 

Gupt Navratri 2026: गुप्त नवरात्रि में राशि के अनुसार करेंगे शक्ति साधना तो जल्द पूरी होगी मनोकामना

10. मंदिर के ऊपर से नहीं उड़ते पक्षी और जहाज

अत्यंत ही खूबसूरत भगवान जगन्नाथ धाम की तमाम रोचक बातों में से एक उनके मंदिर के ऊपर से किसी भी जहाज या पक्षी का न उड़ना है. इसी प्रकार जगन्नाथ मंदिर की कभी भी परछाईं भी नहीं बनती है. 

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Rath Yatra 2026, Bhagwan Jagannath, Jagannath Temple Puri, Jagannath Mandir, Faith
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com