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भगवान महावीर के जन्म से त्याग तक, Mahavir Jayanti के बारे में 10 सबसे जरूरी बातें, जो हर किसी को जरूर पता होनी चाहिए

Mahavir Jayanti 2026: भगवान महावीर जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंकर थे. महावीर जयंती जैन धर्म का एक बहुत ही महत्वपूर्ण पर्व है. महावीर जयंती के बारे में 10 सबसे जरूरी बातें.

भगवान महावीर के जन्म से त्याग तक, Mahavir Jayanti के बारे में 10 सबसे जरूरी बातें, जो हर किसी को जरूर पता होनी चाहिए
महावीर जयंती के बारे में 10 सबसे जरूरी बातें
file photo

Mahavir Jayanti 2026: महावीर जयंती जैन धर्म का एक बहुत ही महत्वपूर्ण पर्व है. यह भगवान महावीर के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है. चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर भगवान महावीर का जन्म हुआ था. यह दिन शांति, अहिंसा और आत्मिक जागरूकता की शिक्षा देता है. महावीर जयंती सादगी और श्रद्धा के साथ मनाई जाती है. उनकी शिक्षाएं जीवन में सफलता, शांति और संतुलन पाने का मार्ग भी दर्शाती हैं. ऐसे हर भक्त को पता होनी चाहिए महावीर जयंती के बारे में 10 सबसे जरूरी बातें.

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भगवान महावीर का जन्म

भगवान महावीर का जन्म 599 ईसा पूर्व में बिहार के वर्तमान वैशाली के पास कुंडग्राम में हुआ था. जैन धर्म में उनके जन्म को बहुत पवित्र माना जाता है. यह दिन भगवान महावीर के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है.

24वें तीर्थंकर

भगवान महावीर जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंकर थे. तीर्थंकर वे महान आत्माएं होती हैं, जो लोगों को मोक्ष का मार्ग दिखाती हैं.

भगवान महावीर का अहिंसा का संदेश

भगवान महावीर की मुख्य शिक्षा अहिंसा थी. उन्होंने सभी जीवों के प्रति दया और करुणा रखने पर जोर दिया.

सरल जीवन का मार्ग

भगवान महावीर ने सादा जीवन, त्याग और आत्म‑संयम अपनाने की सीख दी और भौतिक चीजों से दूर रहने को कहा.

कम उम्र में त्याग

30 साल की उम्र में भगवान महावीर ने राजसी जीवन त्याग दिया और साधना तथा तपस्या का रास्ता अपनाया.

ध्यान और तपस्या के वर्ष

उन्होंने लगभग 12 साल तक कठिन तपस्या और गहन ध्यान किया, जिसके बाद उन्हें केवला ज्ञान यानी पूर्ण ज्ञान प्राप्त हुआ.

सत्य और आत्म‑संयम की शिक्षा

उनकी शिक्षाएं सत्य, चोरी न करना (अस्तेय), ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह (कम से कम संग्रह) पर आधारित हैं.

महावीर जयंती कैसे मनाई जाती है?

इस दिन लोग जैन मंदिरों में जाते हैं, पूजा करते हैं, शोभा यात्राओं में शामिल होते हैं और प्रवचन सुनते हैं. भगवान महावीर की मूर्ति का अभिषेक भी किया जाता है.

दान और सेवा का महत्व

गरीबों को भोजन कराना और जरूरतमंदों की मदद करना इस पर्व का अहम हिस्सा है.

शांति और आत्म‑चिंतन का दिन

महावीर जयंती केवल पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्म‑चिंतन का समय भी है. यह हमें दया, विनम्रता और आंतरिक शांति अपनाने की प्रेरणा देती है.

आज के समय में महत्व

आज की तेज और तनाव भरी दुनिया में भगवान महावीर की अहिंसा, नैतिक जीवन और सच्चे आचरण की शिक्षाएं पहले से कहीं ज्यादा प्रासंगिक हैं.

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