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Kanwar Yatra 2026: कांवड़ यात्रा में लोग नंगे पैर ही क्यों चलते हैं? इसके पीछे क्या है धार्मिक वजह, जानिए...

Kanwar Yatra Haridwar: कांवड़ यात्रा में नंगे पैर चलना तप, समर्पण और विनम्रता का प्रतीक माना जाता है. ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल पांडेय ने बताया कि यह भगवान शिव के प्रति अटूट आस्था और आत्मसंयम दर्शाता है.

Kanwar Yatra 2026: कांवड़ यात्रा में लोग नंगे पैर ही क्यों चलते हैं? इसके पीछे क्या है धार्मिक वजह, जानिए...
नंगे पैर चलना कांवड़ यात्रा के प्रमुख नियमों में से एक माना जाता है
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कांवड़ यात्रा में आपने अक्सर श्रद्धालुओं को नंगे पैर चलते देखा होगा. कई कांवड़िए सैकड़ों किलोमीटर की कठिन यात्रा बिना चप्पल या जूते के पूरी करते हैं. यह सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि भगवान शिव के प्रति समर्पण, तप और श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है. ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल पांडेय ने बताया कि नंगे पैर चलना कांवड़ यात्रा के प्रमुख नियमों में से एक माना जाता है, जो भक्ति के साथ आत्मसंयम का भी संदेश देता है.

क्यों चलते हैं कांवड़िए नंगे पैर

पंडित कौशल पांडेय बताते हैं कि कांवड़ यात्रा को एक तपस्या माना गया है. नंगे पैर चलकर श्रद्धालु अपने कष्ट भगवान शिव को समर्पित करते हैं. धार्मिक मान्यता है कि इससे अहंकार का त्याग होता है और भक्ति की भावना मजबूत होती है.

शिव भक्ति और संयम का प्रतीक

कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालु सिर्फ नंगे पैर ही नहीं चलते, बल्कि सात्विक भोजन करते हैं. ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं और पूरे समय भगवान शिव का स्मरण करते हैं. यह यात्रा मन, वचन और कर्म की शुद्धि का माध्यम मानी जाती है.

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क्या हर कांवड़िए के लिए नंगे पैर चलना है जरूरी

ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल पांडेय के अनुसार, धार्मिक मान्यताओं में नंगे पैर चलने का विशेष महत्व बताया गया है, लेकिन यदि किसी व्यक्ति को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी, चोट या अन्य चिकित्सकीय कारण हों तो वह अपनी क्षमता के अनुसार यात्रा कर सकता है. आस्था के साथ स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है.

क्या कहते हैं पंडित कौशल पांडेय

ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल पांडेय ने बताया कि कांवड़ यात्रा का मूल उद्देश्य भगवान शिव के प्रति श्रद्धा, अनुशासन और सेवा भाव है. नंगे पैर चलना इसी तप और समर्पण का प्रतीक है. हालांकि, श्रद्धा के साथ सुरक्षा और स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी उतना ही आवश्यक है.

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