सावन का महीना शुरू होने वाला है. सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति का सबसे पवित्र समय माना जाता है. सावन में लाखों शिवभक्त कांवड़ यात्रा पर जाते हैं और गंगा जल लाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं. इस साल कांवड़ यात्रा 30 जुलाई से शुरू होकर 11 अगस्त तक चलेगी. 11 अगस्त को सावन शिवरात्रि के दिन श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे. ऐसे में कांवड़ लेने जाने वालों को बहुत से नियमों का पालन करना पड़ता है. चलिए आपको बताते हैं अगर आप कांवड़ लेने जा रहे हैं तो किन नियमों का पालन करना होगा और इसकी क्या मान्यता है.
कांवड़ को जमीन पर न रखना
गंगाजल से भरी कांवड़ को कभी भी सीधे जमीन पर नहीं रखा जाता है. विश्राम के समय इसे पेड़ की शाखाओं या स्टैंड पर लटकाया जाता है. अगर, यह जमीन को छू जाए, तो कांवड़ खंडित मानी जाती है और भक्त को फिर से नया जल भरना पड़ता है.
खान-पान और नशा
यात्रा के दौरान पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करें. कांवड़ लेने जाने वाले प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा, तंबाकू और किसी भी प्रकार के नशे से पूरी तरह दूर रहें. कुछ लोग भांग या अन्य नशे का सेवन करते हैं, लेकिन शास्त्रों के अनुसार इसे वर्जित माना गया है.
चमड़े की वस्तुओं का निषेध
कावड़िए चमड़े से बनी किसी भी वस्तु जैसे बेल्ट, जूते या पर्स का उपयोग नहीं कर सकते. यात्रा के समय केवल नंगे पैर चलने की परंपरा है.
पहनावा और शारीरिक शुद्धता
पूरे सफर में नंगे पैर चलना अनिवार्य माना जाता है. भगवा या सफेद रंग के वस्त्र धारण करें. अगर रास्ते में शौच जाना पड़े, तो उसके बाद गंगाजल से स्नान या आचमन करके खुद को पवित्र करना जरूरी है. इस दौरान बाल और नाखून नहीं काटे जाते.
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