सावन का महीना शुरू होते ही देशभर में भगवान शिव के भक्त कांवड़ यात्रा की तैयारी में जुट जाते हैं. ऐसी मान्यता है कि कांवड़ लाकर शिवलिंग पर गंगाजल चढ़ाने से भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं और भक्त की मनोकामनाएं पूरी करते हैं. लेकिन अगर आप इस साल पहली बार कांवड़ उठाने जा रहे हैं, तो कुछ जरूरी नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन नियमों की अनदेखी करने से पूजा का पूरा फल नहीं मिल पाता.
कांवड़ यात्रा में रखें इन बातों का खास ध्यान
ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल पांडेय के अनुसार, कांवड़ यात्रा पर निकलने से पहले और पूरे सावन महीने में मांस, शराब और तामसिक भोजन से दूरी बनाकर रखें. यात्रा के दौरान साफ-सफाई का विशेष ध्यान दें और मन, वचन व कर्म से पवित्र रहने की कोशिश करें.
जमीन पर क्यों नहीं रखी जाती है कांवड़
उन्होंने बताया कि गंगाजल से भरी कांवड़ को कभी भी सीधे जमीन पर नहीं रखना चाहिए. अगर कहीं रुकना जरूरी हो, तो उसे किसी ऊंचे स्टैंड या स्थान पर ही रखें. बिना स्नान किए कांवड़ को छूने से भी बचें.
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यात्रा में इन गलतियों से भी बचें
इसके अलावा, धार्मिक मान्यता के अनुसार कांवड़ को पेड़ के नीचे नहीं रखना चाहिए और न ही उसे सिर के ऊपर से ले जाना चाहिए. यात्रा के दौरान किसी से विवाद या अपशब्द बोलने से बचें. पूरे रास्ते श्रद्धा और भक्ति के साथ 'बोल बम' का जयघोष करें.
कब शुरू होगी कांवड़ यात्रा 2026
बता दें कि इस साल कांवड़ यात्रा 30 जुलाई 2026 से शुरू होकर 11 अगस्त 2026 यानी सावन शिवरात्रि तक चलेगी. इस दौरान हरिद्वार, वाराणसी और झारखंड के बैद्यनाथ धाम समेत कई शिव मंदिरों में लाखों श्रद्धालु पहुंचेंगे. कांवड़ यात्रा मुख्य रूप से तीन प्रकार की होती है सामान्य, डाक और दांडी. हर प्रकार की यात्रा के अपने अलग नियम और परंपराएं हैं, जिनका पालन श्रद्धा के साथ किया जाता है.
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