विज्ञापन

आज कजरी तीज, जानिए व्रत के नियम, पूजा विधि और महत्व

कजरी तीज का व्रत आज रखा जाएगा. जानिए कजरी तीज व्रत के नियम, पूजा विधि और महत्व.

आज कजरी तीज, जानिए व्रत के नियम, पूजा विधि और महत्व
कजरी तीज

हर साल भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को कजरी तीज मनाई जाती है. इस साल 31 अगस्त यानी आज सोमवार को कजरी तीज का व्रत रखा जाएगा. कजरी तीज का व्रत मुख्य रूप से सुहागिन महिलाओं द्वारा पति की लंबी उम्र, सुखद वैवाहिक जीवन और माता पार्वती-भगवान शिव के आशीर्वाद के लिए रखा जाता है. चलिए आपको बताते हैं कजरी तीज व्रत के नियम, पूजा विधि और महत्व क्या है.

कजरी तीज शुभ समय

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि की शुरुआत 30 अगस्त को सुबह 9 बजकर 38 मिनट पर हो रही है. वहीं, इस तिथि का समापन 31 अगस्त को सुबह 8 बजकर 52 मिनट पर होगा. ऐसे में उदया तिथि को देखते हुए कजरी तीज का व्रत 31 अगस्त दिन सोमवार को रखा जाएगा.

कजरी तीज व्रत के नियम

  • निर्जला या फलाहार- यह व्रत पारिवारिक परंपरा के अनुसार निर्जला या फलाहार रखा जाता है.
  • सोलह श्रृंगार- महिलाएं इस दिन पारंपरिक वस्त्र पहनकर सोलह श्रृंगार करती हैं.
  • चंद्र दर्शन- रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोला जाता है.
  • सत्तू का महत्व- व्रत खोलने के समय जौ, गेहूं या चने के सत्तू का विशेष महत्व होता है.

कजरी तीज का महत्व

पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था. इस तपस्या का फल उन्हें 108 जन्मों के बाद मिला, जब भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को शिव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया. यही कारण है कि इस दिन को दांपत्य सुख की प्रतीक तिथि माना जाता है. यह व्रत विशेष रूप महिलाएं रखती हैं, जो न केवल पति की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करती हैं, बल्कि अविवाहित कन्याएं अच्छे वर की कामना से इस दिन उपवास करती हैं. इस दिन सुहागिन महिलाएं विशेष रूप से हरी साड़ी, हरी चूड़ियां, सिंदूर, बिंदी और मेहंदी आदि सोलह श्रृंगार करती हैं और रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर सुखी वैवाहिक जीवन की प्रार्थना करती हैं

पूजा विधि

स्नान और संकल्प- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें. इसके बाद व्रत का संकल्प लें.

शिव-पार्वती की स्थापना- चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति या चित्र स्थापित करें.

पूजन सामग्री- माता पार्वती को सोलह श्रृंगार की वस्तुएं अर्पित करें. भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, अक्षत, फूल और धूप-दीप चढ़ाएं.

नीम की पूजा- कजरी तीज पर नीम की डाली या पेड़ की पूजा करने का विशेष विधान है.

कथा और आरती- कजरी तीज की व्रत कथा सुनें या पढ़ें और अंत में परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हुए आरती करें.

चंद्रमा को अर्घ्य- रात्रि में चंद्रमा के उदय होने पर कच्चे दूध और जल से अर्घ्य देकर व्रत खोलें.

यह भी पढ़ें:- जन्माष्टमी पर कान्हा की झांकी सजाने के 7 खूबसूरत तरीके, घर में दिखेगा वृंदावन जैसा माहौल

यह भी पढ़ें:- गणेश चतुर्थी पर घर में गणपति स्थापना से पहले जरूर करें ये 7 काम, पॉजिटिव एनर्जी से भर जाएगा माहौल, जानिए नियम और सही पूजा विधि

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Kajari Teej, Teej, Faith
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com