Chandrama Ki Puja Kaise Kare: हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक मास के शुक्लपक्ष की पंद्रहवीं तिथि पूर्णिमा कहलाती है. प्रत्येक मास में पड़ने वाली इस पूर्णिमा का अपना एक अलग धार्मिक महत्व होता है क्योंकि इसी पावन तिथि पर सारे जगत के नाथ माने जाने वाले भगवान विष्णु की विशेष उपासना और उपवास रखा जाता है तो वहीं यह पावन पर्व मन के कारक कहलाने वाले चंद्र देवता की पूजा के लिए भी अत्यंत ही शुभ और फलदायी माना गया है. पंचांग के अनुसार आज ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा चंद्रमा की कब और किस विधि से पूजा करने पर क्या फल मिलता है, आइए इसे विस्तार से जानते हैं.
आज चंद्रमा कब निकलेगा?
पंचांग के अनुसार आज 29 जून 2026, सोमवार को ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा पर चंद्रोदय शाम को 07:16 बजे होगा तो वहीं चन्द्रास्त अगले दिन 30 जून 2026, मंगलवार को प्रात:काल 05:15 बजे होगा.
ज्येष्ठ पूर्णिमा पर कैसे करें चंद्रमा की पूजा?

हिंदू मान्यता के अनुसार ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा पर चंद्र देवता की पूजा के लिए साधक को सायंकाल चंद्रोदय से पूर्व तन और मन से पवित्र होकर धुले हुए सफेद वस्त्र धारण करना चाहिए. इसके बाद एक लोटे में दूध और गंगाजल अथवा शुद्ध जल, मिश्री और अक्षत डालकर अर्घ्य देना चाहिए. चंद्र देवता को अर्घ्य देते समय साधक को मन में 'ॐ सों सोमाय नम:' मंत्र का जप करना चाहिए. चंद्र देवता की पूजा में विशेष रूप से खीर का भोग लगाएं. मान्यता है कि पूर्णिमा पर पूजा के इस उपाय को करने पर चंद्र देवता शीघ्र ही प्रसन्न होकर अपनी कृपा बरसाते हैं.
ज्येष्ठ पूर्णिमा पर करें ये महाउपाय
आज ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा पर सोमवार का सुखद संयोग बना है. यह दिन न सिर्फ चंद्र देवता बल्कि भगवान शिव की पूजा के लिए भी उत्तम माना जाता है, जिन्होंने चंद्रमा को अपने सिर पर धारण किया हुआ है. ऐसे में आज साधक को इन दोनों देवताओं की विधि-विधान से पूजा और दूध, चावल, चीनी, मिश्री, सफेद कपड़े आदि का दान करना चाहिए.
चंद्रमा की पूजा में इन बातों का रखें ध्यान

- चंद्रमा को अर्घ्य ऐसी जगह पर दें जहां पर उसका पवित्र जल किसी के पैरों के नीचे न आने पाए.
- चंद्रमा को अर्घ्य देते समय लोटे को अपने सिर के उपर उठाकर जल नीचे की ओर गिराएं और ऐसा करते समय चंद्र देवता को देखें.
- शुभ फल की प्राप्ति के लिए चंद्रमा को अर्घ्य चंद्रोदय के समय ही देने का प्रयास करें.
- चंद्रमा को जल देने के लिए चांदी का पात्र सबसे उत्तम माना जाता है, यदि चांदी का पात्र न मिले तो तांबे के लोटे से जल दें.
- चंद्रमा का अर्घ्य देते समय आपके पैरों में जल के छींटे न पड़े इसके लिए उसे पूजा स्थान पर गमला आदि रख लें.
- चंद्र देवता को अर्घ्य देने के बाद अपने स्थान पर ही तीन या पांच बार घूमकर परिक्रमा और अपने सुख-समृद्धि की कामना करें.
ज्येष्ठ पूर्णिमा पर चंद्रमा की पूजा का महत्व

हिंदू धर्म में प्रत्येक मास की पूर्णिमा तिथि को चंद्रमा की पूजा बेहद शुभ और फलदायी मानी गई है क्योंकि इस दिन चंद्र देवता अपनी 16 कलाओं से युक्त होकर पूर्ण आकार लिए होते हैं. मान्यता है कि इस पावन तिथि पर मन के कारण माने जाने वाले चंद्र देव की विधि-विधान से अर्घ्य देकर पूजा करने पर व्यक्ति को सुख-समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्त होती है. चंद्र देवता के आशीर्वाद से व्यक्ति मन हमेशा शांत रहता है और वह कठिन से कठिन समय में भी बड़े धैर्य और विवेक के साथ निर्णय लेता है. हिंदू मान्यता के अनुसार जिस व्यक्ति पर चंद्र देवता की कृपा बरसती है, वह अपने जीवन में अपार सफलता हासिल करते हुए सुखी जीवन जीते हैं.
आषाढ़ मास की पूर्णिमा कब है?
पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि 28 जुलाई 2026, मंगलवार की शाम 06:18 बजे से प्रारंभ होकर अगले दिन 29 जुलाई 2026, बुधवार को रात्रि 08:05 बजे तक रहेगी. ऐसे में आषाढ़ मास की पूर्णिमा 29 जुलाई 2026, बुधवार को रहेगी और इस दिन चंद्रोदय सायंकाल 07:21 बजे होगा.
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