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Jitiya Vrat 2026: जितिया व्रत की पूजा में पढ़ें जीमूतवाहन की कथा, मिलेगा व्रत का पूरा फल

हर साल आश्विन महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जितिया व्रत रखा जाता है. इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र के लिए 24 घंटे का निर्जला व्रत रखती हैं.

Jitiya Vrat 2026: जितिया व्रत की पूजा में पढ़ें जीमूतवाहन की कथा, मिलेगा व्रत का पूरा फल
जितिया व्रत कथा
Photo Credit: NDTV

Jitiya Vrat Katha: आज 3 अक्टूबर को जितिया व्रत रखा जा रहा है. इसे जीवित्पुत्रिका व्रत के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र के लिए 24 घंटे का निर्जला व्रत रखती हैं. मुख्य रूप ये व्रत बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है. पंचांग के अनुसार जितिया व्रत आश्विन महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है. इस दिन पूजा के दौरान जीमूतवाहन देवता की कथा पढ़ना या सुनना अत्यंत फलदायी होता है. माना जाता है इस कथा के बिना व्रत का पूरा फल नहीं मिलता है.

यहां पढ़ें जितिया व्रत की कथा | Jitiya Vrat Katha

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान जीमूतवाहन के पिता गंधर्व के शासक थे. लंबे समय तक शासन करने के बाद उन्होंने महल छोड़ दिया और अपने पुत्र को राजा बनाकर जंगल में चले गए. जीमूतवाहन उनके बाद राजा बने. जीमूतवाहन ने अपने पिता की उदारता और करुणा को अपने राजकाज के कामों में लागू किया. उन्होंने काफी समय तक शासन किया, उसके बाद उन्होंने भी राजमहल छोड़ दिया और अपने पिता के साथ जंगल में रहने लगे. जहां उनका विवाह मलयवती नाम की एक कन्‍या से हुआ.

एक दिन जीमूतवाहन को जंगल में एक वयोवृद्ध महिला रोती हुई मिली. उसके चेहरे पर एक भयानक भाव था. जीमूतवाहन ने उससे उसकी परेशानी का वजह पूछा, तो उसने बताया कि गरुड़ पक्षी को नागों ने वचन दिया है कि वह पाताल लोक में न प्रवेश करें, वे हर रोज एक नाग उनके पास आहार के रूप में भेज दिया करेंगे.

उस वृद्ध महिला ने जीमूतवाहन को बताया कि इस बार गरुड़ के पास जाने की बारी उनके बेटे शंखचूड़ की है. अपने पिता की तरह दयालु हृदय वाले जीमूतवाहन ने कहा कि वह उनके बेटे को कुछ नहीं होने देंगे. इसके बजाय उन्होंने खुद को गरुड़ को भोजन के रूप में पेश करने का बात कही.

जीमूतवाहन ने खुद को लाल कपड़े में लपेटा और गरुड़ के पास पहुंचे, गरुड़ पक्षी ने जीमूतवाहन को नाग समझकर अपने पंजों में उठा लिया. इसके बाद जीमूतवाहन ने गरुड़ को पूरी कहानी सुनाई कि कैसे उन्होंने किसी और के जीवन के लिए खुद को बलिदान कर दिया. जीमूतवाहन की दयालुता से प्रभावित होकर गरुड़ ने उसे जीवनदान दे दिया तथा भविष्य में कभी किसी का जीवन न लेने का वचन दिया.

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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