पुत्र की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना से रखा जाने वाला जितिया व्रत इस साल अक्टूबर में रखा जाएगा. इसे जीवित्पुत्रिका व्रत भी कहा जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन माताएं संतान के लिए निर्जला व्रत रखती हैं और भगवान जीमूतवाहन की पूजा करती हैं. आचार्य मदन मोहन ने बताया कि यह व्रत लोक आस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है, जिसमें माताएं संतान की कुशलता और दीर्घायु की कामना करती हैं.
जितिया व्रत में किसकी पूजा होती है?
आचार्य मदन मोहन बताते हैं कि जितिया व्रत में मुख्य रूप से राजा जीमूतवाहन की पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, जीमूतवाहन ने नागवंश की रक्षा के लिए अपने प्राणों का त्याग करने का संकल्प लिया था. इसी कथा को संतान की रक्षा और लंबी उम्र से जोड़कर देखा जाता है. व्रत रखने वाली महिलाएं जितिया व्रत की कथा भी सुनती हैं.
कब रखा जाएगा जितिया व्रत
इस साल जितिया व्रत 3 अक्टूबर 2026 को रखा जाएगा. पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि 3 अक्टूबर को सुबह 9:53 बजे से शुरू होकर 4 अक्टूबर को सुबह 7:27 बजे तक रहेगी. इसके बाद नवमी तिथि शुरू होगी. इसी वजह से व्रत का पाारण 4 अक्टूबर को सुबह 7:27 बजे के बाद किया जाएगा.
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जितिया पूजा में किन चीजों का इस्तेमाल होता है?
आचार्य के अनुसार, पूजा में कुश का विशेष महत्व माना जाता है. इसके अलावा भैंस का दूध, दही, गोरस, महुआ के फल, फूल-पत्ते, ज्वार के बीज, धान का लावा, हल्दी, लाल चंदन, मिट्टी का दीपक, मिट्टी के बर्तन, नए कपड़े, जनेऊ और अलग-अलग तरह के अनाज पूजा सामग्री में शामिल किए जााते हैं.
क्यों खास है यह व्रत?
जितिया व्रत को संतान की लंबी उम्र और उसके सुखी जीवन की कामना से जुड़ा माना जाता है. यह व्रत खासतौर पर माताओं के लिए महत्वपूर्ण है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, व्रत के दौरान कथा सुनना, विधि-विधान से पूजा करनाा और संतान के लिए मंगलकामना करना इस पर्व का अहमम हिस्सा है.
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