सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति और सुहागिन महिलाओं के विशेष श्रृंगार का समय माना जाता है. इस पूरे महीने महिलाएं व्रत रखती हैं, मेहंदी लगाती हैं, झूला झूलती हैं और हरे रंग के कपड़े व चूड़ियां पहनती हैं. ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल पांडेय के अनुसार, धार्मिक मान्यताओं में हरी चूड़ियां केवल श्रृंगार का हिस्सा नहीं, बल्कि सुखी वैवाहिक जीवन, हरियाली और समृद्धि का भी प्रतीक मानी जाती हैं.
सावन में क्या है हरे रंग का महत्व
ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल पांडेय के अनुसार, सावन बारिश और हरियाली का मौसम होता है. चारों ओर फैली हरियाली प्रकृति में नई ऊर्जा और जीवन का संदेश देती है. यही वजह है कि हरा रंग इस महीने का सबसे शुभ रंग माना जाता है. इसी दौरान हरियाली तीज जैसे पर्व भी मनाए जाते हैं, जिनमें हरे रंग का विशेष महत्व होता है.
भगवान शिव और प्रकृति का गहरा संबंध
उन्होंने बताया कि धार्मिक मान्यताओं में भगवान शिव का प्रकृति से विशेष जुड़ाव है. उनका निवास हिमालय में माना जाता है और उनकी पूजा में बेलपत्र, धतूरा, भांग जैसी हरी वस्तुएं अर्पित की जाती हैं. इसलिए सावन में हरे रंग को भगवान शिव की प्रियता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है.
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क्यों पहनती हैं महिलाएं हरी चूड़ियां
ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल पांडेय ने आगे बताया कि ऐसी मान्यता है कि सावन में हरी चूड़ियां पहनकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से अखंड सौभाग्य, वैवाहिक सुख और परिवार में खुशहाली का आशीर्वाद मिलता है. यही कारण है कि सुहागिन महिलाएं पूरे सावन हरे रंग की चूड़ियों और श्रृंगार को विशेष महत्व देती हैं.
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