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आज रखा जा रहा हेरंब संकष्टी चतुर्थी का व्रत, जानें शुभ मुहूर्त और गणेश पूजा की आसान विधि

धार्मिक ग्रंथों में हेरंब संकष्टी चतुर्थी के व्रत को संकट में पड़े लोगों के लिए सहारा देने वाला बताया गया है. मान्यता है कि श्रद्धा के साथ यह व्रत करने से बड़ी से बड़ी परेशानियां भी दूर हो सकती हैं.

आज रखा जा रहा हेरंब संकष्टी चतुर्थी का व्रत, जानें शुभ मुहूर्त और गणेश पूजा की आसान विधि
हेरंब संकष्टी चतुर्थी आज
(Photo Credit: NDTV)

Heramba Sankashti Chaturthi: भाद्रपद यानी भादो महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को हेरंब संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है. इस दिन भगवान गणेश की पूजा और व्रत करने का विधान है. आज यानी 31 अगस्त, सोमवार को हेरंब संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जा रहा है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से गणेश जी की पूजा करने से जीवन में आने वाली परेशानियां दूर होती हैं और भक्तों को संकट से निकलने की शक्ति मिलती है.

कब शुरू और कब खत्म होगी चतुर्थी तिथि?

पंचांग के अनुसार, चतुर्थी तिथि 31 अगस्त की सुबह 8 बजकर 50 मिनट पर शुरू होगी और 1 सितंबर की सुबह 8 बजकर 29 मिनट पर समाप्त होगी. ऐसे में उदया तिथि को ध्यान में रखते हुए आज संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जा रहा है. संकष्टी चतुर्थी में चंद्रमा का विशेष महत्व होता है. आज के दिन चंद्रोदय रात 8 बजकर 29 मिनट पर होगा.

हेरंब संकष्टी चतुर्थी पूजा का शुभ मुहूर्त

आज अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 2 मिनट से 12 बजकर 52 मिनट तक रहेगा. अभिजित मुहूर्त को पूजा और किसी भी शुभ काम के लिए दिन का सबसे शुभ समय माना जाता है. वहीं, आज अमृत काल रात 1 बजे से 2 बजकर 35 मिनट तक रहेगा.

इस तरह करें गणेश जी की पूजा
  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें. आज के दिन लाल या पीले कपड़े पहना शुभ माना जाता है.
  • इसके बाद पूजा की जगह को साफ करके गंगाजल से शुद्ध कर लें.
  • एक साफ चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें.
  • इसके बाद हाथ में जल व अक्षत लेकर व्रत का संकल्प लें.
  • पूजा में गणेश जी को दूर्वा, लाल फूल, चंदन, कुमकुम, अक्षत और हल्दी अर्पित करें.
  • भगवान को जनेऊ भी चढ़ाएं.
  • इसके बाद लड्डू या मोदक, फल और पान का भोग लगाएं.
  • भगवान के सामने घी का दीपक और धूप जलाएं.
  • पूजा के दौरान 'ॐ गं गणपतये नमः' या 'गणेशाय नमः' मंत्र का 11, 21 या 108 बार जाप कर सकते हैं.
  • इसके बाद हेरंब संकष्टी चतुर्थी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें.
  • आखिर में गणेश जी की आरती कर पूजा संपन्न करें.
चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद करें पारण

शाम को गणेश जी की दोबारा पूजा और आरती करें. रात में चंद्रोदय होने पर चंद्रमा के दर्शन करें और जल से अर्घ्य दें. इसके बाद गणेश जी को भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण करें और व्रत खोलें.

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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