आज 31 अगस्त को सुहागिन महिलाएं श्रद्धा और भक्ति के साथ कजरी तीज का व्रत रख रही हैं. हिंदू धर्म में कजरी तीज का विशेष महत्व माना गया है. इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, परिवार की सुख-शांति और घर की खुशहाली की कामना से व्रत रखती हैं. कजरी तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने का विधान है. मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा और व्रत करने से भोलेनाथ और माता गौरी की कृपा प्राप्त होती है. यह व्रत भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है. इस बार तृतीया तिथि 30 अगस्त की सुबह 9 बजकर 36 मिनट से शुरू हुई. इसका समापन 31 अगस्त की सुबह 8 बजकर 50 मिनट पर होगा. ऐसे में उदया तिथि के नियम के अनुसार, कजरी तीज का व्रत आज 31 अगस्त, सोमवार को रखा जा रहा है.
इस दिन महिलाएं दिनभर व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती का पूजन करती हैं और रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण किया जाता है. कजरी तीज की पूजा में व्रत कथा सुनना या पढ़ना भी बहुत जरूरी माना जाता है. मान्यता है कि कथा के बिना पूजा अधूरी रह जाती है. ऐसे में अगर आप भी आज उपवास रख रही हैं, तो पूजा के बाद यहां से कजरी तीज की कथा पढ़ सकती हैं.
कजरी तीज व्रत कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार, एक समय में एक गांव में एक गरीब ब्राह्मण अपनी पत्नी के साथ रहता था. परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी. इसके बावजूद ब्राह्मण की पत्नी भगवान शिव और माता पार्वती में गहरी आस्था रखती थी. इसी कड़ी में कजरी तीज के दिन उसने भगवान से परिवार के संकट दूर करने की प्रार्थना करते हुए कठिन व्रत रखा. वह पूरे दिन बिना अन्न और जल के रही. रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर पूजा पूरी करने की तैयारी थी, लेकिन घर में पूजा के लिए जरूरी सामान तक नहीं था.
अपनी पत्नी को इस हाल में देख ब्राह्मण का मन विचलित हो गया. तब पत्नी ने ब्राह्मण को समझाया कि भगवान उनकी परीक्षा ले रहे हैं. ऐसे में उन्हें अपना विश्वास नहीं छोड़ना चाहिए. इसके बाद वह एक महाजन के घर से थोड़ा चना और गुड़ उधार लेने चली गई.
उसी समय महाजन के घर में कीमती सामान चोरी हो गया था. पहरेदारों ने ब्राह्मण की पत्नी को चोर समझकर पकड़ लिया और राजा के सामने पेश कर दिया. राजा ने पूरी बात जाने बिना उसे कारागार में डाल दिया.
इधर, सुबह जब वह घर नहीं लौटी, तो ब्राह्मण परेशान होकर राजा के पास पहुंचा और पूरी सच्चाई बताई. जांच के बाद पता चला कि ब्राह्मण की पत्नी निर्दोष थी. अपनी गलती का एहसास होने पर राजा ने ब्राह्मण की पत्नी को न केवल सम्मान के साथ जेल से मुक्त किया बल्कि दंपत्ति को धन, वस्त्र, अन्न और ढेरों आभूषण भी दान किए. इसके बाद उनके घर की गरीबी दूर हो गई और वे सुख-शांति से रहने लगे.
धार्मिक मान्यता है कि जो भक्त सच्ची श्रद्धा और भक्ति से कजरी तीज का उपवास रखता है, भगवान शिव-माता पार्वती की कृपा से उनके जीवन के संकट भी इसी तरह दूर हो जाते हैं.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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