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हरतालिका तीज पर माता पार्वती को क्या चढ़ाएं? जानें विशेष भोग और पूजा सामग्री

धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी. तीज की पूजा में माता पार्वती के श्रृंगार और उन्हें सुहाग की सामग्री अर्पित करने का विशेष महत्व माना जाता है.

हरतालिका तीज पर माता पार्वती को क्या चढ़ाएं? जानें विशेष भोग और पूजा सामग्री
हरतालिका तीज पर माता पार्वती को क्या चढ़ाएं?

Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज हिंदू धर्म का एक प्रमुख और कठिन व्रत माना जाता है, जो भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है. हर साल भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज का पर्व मनाया जाता है. इस साल हरतालिका तीज सोमवार, 14 सितंबर को मनाई जाएगी. इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, सुखी दांपत्य जीवन और अखंड सौभाग्य के व्रत रखती हैं, जबकि कुंवारी कन्याएं मनचाहा वर पाने की कामना से व्रत रखती हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी. तीज की पूजा में माता पार्वती के श्रृंगार और उन्हें सुहाग की सामग्री अर्पित करने का विशेष महत्व माना जाता है. ऐसे में चलिए आपको बताते हैं हरतालिका तीज पर माता पार्वती को क्या चढ़ाएं?

हरतालिका तीज पर माता पार्वती को क्या चढ़ाएं?

हरतालिका तीज पर माता पार्वती को सोलह श्रृंगार की सामग्री और सौभाग्य की वस्तुएं विशेष रूप से अर्पित की जाती हैं. इसमें सिंदूर, कुमकुम, बिंदी, मेहंदी, चूड़ियां और अन्य श्रृंगार सामग्री होती है. पूजा में माता को चुनरी या वस्त्र भी अर्पित किए जाते हैं. मान्यता के अनुसार, पूजा के बाद सुहाग सामग्री को किसी सुहागिन महिला या ब्राह्मणी को दान करना शुभ माना जाता है.

हरतालिका तीज पर माता पार्वती को क्या भोग लगाएं?

हरतालिका तीज पर पूजा के दौरान भगवान शिव और माता पार्वती को फल, मिठाई और नैवेद्य अर्पित किया जाता है. पंचामृत के लिए दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का इस्तेमाल किया जाता है. इसके साथ नारियल, पान, सुपारी और अन्य पारंपरिक पूजन सामग्री भी रखी जाती है. हालांकि, भोग अपनी श्रद्धा के अनुसार लगाया जा सकता है.

हरतालिका तीज का महत्व

हरतालिका शब्द को माता पार्वती और उनकी सखी से जुड़ी कथा से जोड़ा जाता है. धार्मिक कथा के अनुसार, माता पार्वती भगवान शिव को पति के रूप में पाना चाहती थीं. जब उनके विवाह के लिए अन्य योजना बनाई गई, तो उनकी सखी उन्हें वन में ले गईं. वहां माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए कठोर तप और व्रत किया. उनकी तपस्या और अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया.

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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