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Guru Pradosh Vrat 2026: गुरु प्रदोष व्रत पर महादेव को प्रसन्न करने के लिए पढ़ी जाती है ये व्रत कथा

Guru Pradosh Vrat Katha: क्या आप जानते हैं कि महादेव को समर्पित गुरु प्रदोष व्रत क्यों इतना खास है? इस दिन सिर्फ पूजा ही नहीं, बल्कि एक विशेष कथा का पाठ करने से जीवन के सारे दुख-दर्द दूर हो जाते हैं, ऐसी मान्यता है. जानिए, क्या है वो पौराणिक कहानी और इसका महत्व.

Guru Pradosh Vrat 2026: गुरु प्रदोष व्रत पर महादेव को प्रसन्न करने के लिए पढ़ी जाती है ये व्रत कथा
गुरु प्रदोष व्रत पर महादेव को प्रसन्न करने वाली वो कथा...जिसे पढ़ने से बदल सकती है भक्तों की किस्मत!

Guru Pradosh Vrat Katha (गुरु प्रदोष व्रत 2026 कथा) : इस बार का गुरु प्रदोष व्रत बेहद खास है. ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी यानी 28 मई 2026 को महादेव की आराधना करने का भक्तों को मौका मिल रहा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अधिक मास और गुरुवार का यह दुर्लभ संयोग सालों बाद बना है. इस दिन शिव-पार्वती की पूजा के साथ गुरु प्रदोष व्रत कथा सुनने या पढ़ने का अपना ही अलग फल मिलता है.

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आखिर क्यों सुनी जाती है ये कथा? (Why is the Vrat Katha Significant?)

पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार इंद्र और वृत्तासुर के बीच भयंकर युद्ध हुआ था. इंद्र हार के डर से अपने गुरु बृहस्पति की शरण में पहुंचे, तब गुरु ने इंद्र को बताया कि वृत्तासुर कोई साधारण राक्षस नहीं, बल्कि पूर्व जन्म में चित्ररथ नाम का राजा था. शिवजी का उपहास उड़ाने के कारण उसे राक्षस योनि में जन्म लेना पड़ा. गुरुदेव ने इंद्र को विजय पाने के लिए गुरु प्रदोष व्रत करने का सुझाव दिया. इंद्र ने विधि-विधान से यह व्रत रखा, जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें वृत्तासुर पर विजय दिलवाई और देवलोक में शांति लौट आई, तभी से इस व्रत का पालन करने की परंपरा शुरू हुई, जिससे भक्तों को हर मुश्किल से मुक्ति मिलती है. यही वजह है कि आज भी जो भक्त श्रद्धा से यह व्रत रखते हैं, उनके करियर की बाधाएं खत्म होती हैं और जीवन में सुख-शांति का वास होता है.

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व्रत का आध्यात्मिक महत्व (Spiritual Significance of the Vrat)

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, गुरु प्रदोष व्रत न केवल शिव-पार्वती की कृपा दिलाता है, बल्कि यह करियर, संतान सुख और आर्थिक उन्नति के लिए भी बेहद फलदायी है. अधिक मास में पड़ने के कारण इस वर्ष इस व्रत की महत्ता कई गुना बढ़ गई है, क्योंकि इस काल में की गई पूजा से पिछले कर्मों के दोष शांत होते हैं. यह व्रत गुरु (बृहस्पति) ग्रह से जुड़े दोषों को दूर करने के साथ-साथ जीवन में सुख-समृद्धि लाता है. प्रदोष काल में शिव आराधना करने से साधक को मानसिक शांति, आध्यात्मिक ऊर्जा और महादेव का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे दरिद्रता और बाधाएं दूर होती हैं.

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पूजा का सही समय और नियम (Right Time and Rules for Puja)

इस दिन प्रदोष काल यानी शाम 07:12 से रात 09:15 बजे के बीच भगवान शिव का अभिषेक करना सबसे उत्तम माना जाता है. बस एक लोटा जल और पूरी श्रद्धा के साथ महादेव का ध्यान करें, जो व्यक्ति इस दिन नियम से शिवपुराण या प्रदोष व्रत कथा का पाठ करता है, उसकी हर मनोकामना पूरी होती है. गुरु प्रदोष व्रत का यह पावन दिन महादेव की कृपा पाने का सबसे सरल उपाय है. कथा का पाठ करें और अपने जीवन को सकारात्मकता से भरें.

(डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. NDTV इसकी पुष्टि नहीं करता.)
 

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