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योगिनी एकादशी आज, यहां पढ़ें भगवान विष्णु की पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजन विधि, मंत्र और आरती

आइए जानते हैं आज योगिनी एकादशी पर पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा, किस विधि से भगवान विष्णु की पूजा करें-

योगिनी एकादशी आज, यहां पढ़ें भगवान विष्णु की पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजन विधि, मंत्र और आरती
योगिनी एकादशी आज, पढ़ें पूजन विधि, मंत्र और आरती
(P.C- NDTV)

आज 10 जुलाई, शुक्रवार को योगिनी एकादशी का व्रत रखा जा है. एकादशी की तिथि भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है. इस दिन भक्त सच्ची श्रद्धा से श्री हरि की पूजा-अर्चना करते हैं. एक साल में कुल 24 एकादशी आती हैं. इनमें आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को योगिनी एकादशी कहा जाता है. मान्यता है कि योगिनी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है. इस व्रत का पुण्य 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर माना गया है. ऐसे में आइए जानते हैं आज एकादशी पर पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा, साथ ही जानेंगे भगवान विष्णु की पूजन विधि, मंत्र और आरती- 

योगिनी एकादशी पर पूजा का शुभ मुहूर्त 

  • आज ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 54 मिनट से सुबह 5 बजकर 26 मिनट तक रहेगा. 
  • अमृत काल सुबह 8 बजकर 46 मिनट पर शुरू होकर 10 बजकर 15 मिनट तक रहेगा.
  • अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 5 मिनट से दोपहर 12 बजकर 58 मिनट तक रहेगा. यह दिन का सबसे शुभ समय माना जाता है. 
  • विजय मुहूर्त दोपहर 4 बजकर 35 मिनट से से शाम 5 बजकर 39 मिनट तक रहेगा.
  • गोधूलि मुहूर्त रात 9 बजकर 51 मिनट से रात 10 बजकर 8 मिनट तक रहेगा.
एकादशी की पूजा विधि
  • योगिनी एकादशी के दिन सुबह जल्दी स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें. 
  • घर के मंदिर को साफ करके गंगाजल से शुद्ध करें. 
  • इसके बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें. 
  • श्रीहरि को तुलसी दल, पुष्प, धूप और दीप अर्पित करें. 
  • श्रद्धा से भोग लगाएं और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें.
  • योगिनी एकादशी की कथा पढ़ें.
  • अंत में आरती करके पूजा संपन्न करें.
विष्णु भगवान के मंत्र | Lord Vishnu Mantra
  1. ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
  2. ॐ नारायणाय विद्यहे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।।
  3. ॐ विष्णवे नमः
  4. ॐ नमो नारायण। श्री मन नारायण नारायण हरि हरि।
  5. श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे। हे नाथ नारायण वासुदेवाय।।
विष्णु भगवान की आरती | Vishnu bhagwan Ki Aarti

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे.

भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे.

जो ध्यावैफल पावै, दुख बिनसेमन का.

सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का.

ॐ जय जगदीश हरे...

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी.

तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी.

ॐ जय जगदीश हरे...

तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी.

पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी.

ॐ जय जगदीश हरे...

तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता.

मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता.

ॐ जय जगदीश हरे...

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति.

किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैंकुमति.

ॐ जय जगदीश हरे...

दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे.

अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे.

ॐ जय जगदीश हरे...

विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा.

श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा.

ॐ जय जगदीश हरे...

तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा.

तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा.

ॐ जय जगदीश हरे...

जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे.

कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे.

ॐ जय जगदीश हरे...

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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