Eid-E-Ghadeer kise Kahate Hain: आज इस्लामिक कैलेंडर (Islamic Calender) के आखिरी महीने जिल-हिज्जा की 18 तारीख को ईद-ए-ग़दीर का पर्व मनाया जा रहा है. बकरीद के बाद मनाई जाने वाली ईद-ए-ग़दीर शिया मुसलमानों का प्रमुख पर्व है. मान्यता है कि ईद-ए-ग़दीर (Eid-E-Ghadir) के बाद ही शिया मुसलमान हज़रत अली को अपना पहला इमाम मानने लगे. आइए जानते हैं कि आखिर ईद-ए-ग़दीर पर्व के पीछे असल कहानी क्या है? शिया मुसलमानों के लिए आखिर यह पर्व इतना ज्यादा क्यों महत्व रखता है. ईद-ए-ग़दीर पर्व को मनाए जाने की विधि और इसके पीछे संदेश को आइए विस्तार से जानने और समझने का प्रयास करते हैं.
क्यों मनाई जाती है ईद-ए-ग़दीर?
शिया धर्मगुरु मौलाना यासूब अब्बास के अनुसार तकरीबन 1450 साल पहले पैगंबर-ए-इस्लाम हज़रत मुहम्मद साहब अपनी जिंदगी का अंतिम हज करके मक्के से मदीने की ओर आ रहे थे. जब मदीने के रास्ते में मैदान-ए-गदीर नामक स्थान पर पहुंचे तो उन्हें अल्लाह की तरफ से संदेश मिला कि 'ऐ अल्लाह के रसूल वो हुकुम पहुंचा दो जो तुम्हारे उपर ईश्वर की तरफ से नाजिल किया जा चुका. फिर रसूलुल्लाह ने मैदान-ए-गदीर में पूरे मजमे को रोका और अली की विलायत का ऐलान किया और कहा कि जिस-जिस का मैं मौला हूं उस-उस का ये अली भी मौला है.

हज़रत मुहम्मद साहब ने हजरत अली को तकरीबन 1 लाख 24 हज़ार हाजियों के सामने उनका हाथ उठा कर अपना जानशीन बनाया और फिर सभी हाजियों से कहा कि इनको मुबारकबाद दो. इस्लामिक मान्यता के अनुसार मैदान-ए-गदीर पर पैगंबर मुहम्मद साहब ने तकरीबन एक लाख से अधिक हाजियों को संबोधित किया था. इस तरह देखें तो ईद-ए-ग़दीर का पर्व पैगंबर मुहम्मद साहब द्वारा हजरत अली को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त करने की याद में मनाया जाता है.
मौलाना यासूब अब्बास के अनुसार इस्लाम में एक लाख चौबीस हजार पैगंबर आए, जिसमें अंतिम पैगंबर हजरत मुहम्मद साहेब थे. उन्होंने कहा था कि हमारे बाद कोई नबी नहीं आएगा. इसके बाद अल्लाह के हुक्म से पैगंबर मुहम्मद ने विलायत यानि आध्यात्मिक और सामाजिक-राजनीतिक नेतृत्व को हज़रत अली को सौंप दिया था, जिससे इमामत हजरत अली से चली जो इमाम हसन, इमाम हुसैन से होते हुए उनके नस्ल आज तक है जिसमें शिया लोग अपने 12वें इमाम हजरत मेहदी का अभी तक इंतजार कर रहे हैं, उनका मानना है कि वो अभी गैब(पर्दे) में हैं
ईद-ए-ग़दीर कैसे मनाते हैं?
पैगंबर हज़रत मुहम्मद द्वारा हज़रत अली को अपना उत्तराधिकारी घोषित किए जाने वाले पवित्र दिन ईद-ए-ग़दीर को शिया समुदाय बड़ी धूम-धाम से मनाता है. इस दिन लोग नये कपड़े पहनते हैं. सभी घरों में अच्छे पकवान बनाए जाते हैं और जगह-जगह पर महफिलें सजती हैं, साथ ही एक दूसरे को ईदी भी दी जाती है..इस दिन मस्जिदों को सजाया जाता है और वहां पर नमाजे ईद-ए-ग़दीर होती है. सभी लोग एक-दूसरे को मुबारकबाद देते हैं.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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