हिंदू धर्म में विवाह के लिए शुभ तिथि और मुहूर्त का खास महत्व माना जाता है. देवशयनी एकादशी के बाद भगवान विष्णु के योगनिद्रा में जाने के कारण मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाता है. मान्यता है कि देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु के जागने के बाद शादी-विवाह समेत दूसरे शुभ काम फिर शुरू हो जाते हैं. इस साल देवउठनी एकादशी 20 नवंबर 2026 को है. आचार्य मदन मोहन के मुताबिक, देवउठनी के अलावा साल में कुछ ऐसी तिथियां भी होती हैं, जिन्हें विवाह के लिए अबूझ मुहूर्त मानाा जाता है.
देवउठनी एकादशी से शुरू होंगे विवाह के शुभ काम
आचार्य मदन मोहन ने बताया कि 20 नवंबर को देवउठनी एकादशी के साथ मांगलिक कार्यों पर लगा विराम खत्म होगा. इसके बाद नवंबर में विवाह के कई शुभ मुहूर्त मिलेंगे. पंचांग के अनुसार 21, 22, 23, 24, 28 और 29 नवंबर को विवाह के लिए मुहूर्त बतााए गए हैं. देवउठनी एकादशी को भगवान विष्णु के जागने की धार्मिक मान्यता है. इसी वजह से इस दिन से विवाह, गृह प्रवेश और दूसरे मांगलिक कार्यों की शुरुआत को शुभ माना जाता है.
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इन दो तिथियों को भी माना जाता है अबूझ मुहूर्त
उन्होंने बताया कि धार्मिक मान्यताओं में कुछ तिथियों को ऐसा माना जाता है, जिन पर विवाह के लिए अलग से मुहूर्त देखने की जरूरत नहीं पड़ती है. इनमें अक्षय तृतीया और देवउठनी एकादशी प्रमुख मानी जाती हैं. इन तिथियों को अबूझ मुहूर्त कहा जााता है. हालांकि विवाह की तारीख तय करते समय परिवार और वर-वधू की कुंडली, स्थान तथा स्थानीय पंचांग की गणनाा को भी ध्यान में रखाा जा सकता है. इसलिए शादी की तारीख पक्की करने से पहले स्थानीय पंडित या ज्योतिषाचार्य से मुहूर्त की पुष्टि करना उचित रहेगा.
नवंबर में शादी के लिए मिलेंगे कई विकल्प
देवउठनी एकादशी के बाद नवंबर में शादी करने वालों के लिए कई तारीखें उपलब्ध रहेंगी. 21 से 24 नवंबर और फिर 28-29 नवंबर को विवाह मुहूर्त बताए गए हैं. ऐसे में जिन परिवारों में शादी की तैयारी चल रही है, वे अपनी सुविधा के अनुसार तारीख चुन सकते हैं. ध्यान रखें कि विवाह मुहूर्त की गणना पंचांग और स्थान के अनुसार बदल सकती है. इसलिए अंतिम निर्णय लेने से पहले स्थानीय पंचांग से तिथि और समय जरूर मिलान कर लें.
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