हिन्दू धर्म में शरद पूर्णिमा का खास महत्व होता है. इस दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और चंद्र देव की पूजा करना अत्यंत फलदायी माना जाता है. पुराणों के अनुसार, पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और भक्तों को आशीर्वाद देती हैं. पंचांग के अनुसार ये पूर्णिमा आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है. इसे कोजागरी पूर्णिमा और मिथिलांचल में चुमाओन भी कहा जाता है. इसी कड़ी में आइए जानते हैं इस साल शरद पूर्णिमा कब मनाई जाएगी और पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा.
कब है शरद पूर्णिमा?
हिन्दू पंचांग के अनुसार अश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 25 अक्तूबर को सुबह 11 बजकर 55 मिनट पर हो रही है. वहीं, इस तिथि का समापन 26 अक्तूबर को सुबह 9 बजकर 11 मिनट पर होगा. ऐसे में शरद पूर्णिमा 25 अक्तूबर, दिन रविवार को मनाया जाएगा.
शरद पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त
निशिता काल: रात 11 बजकर 39 मिनट से रात 12 बजकर 31 मिनट तक.
खीर का महत्व
शरद पूर्णिमा को चातुर्मास के शयनकाल का अंतिम चरण माना जाता है, जिसके बाद शुभ कार्यों का आरंभ होता है. इस दिन श्रद्धा से मां लक्ष्मी की पूजा करने से घर में समृद्धि और धन का आगमन होता है. इस दिन की सबसे खास परंपरा है खीर को चांदनी में रखा जाना. इस दिन खीर बनाकर उसे रातभर खुले आसमान के नीचे चांद की रोशनी में रखते हैं. धार्मिक मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणें अमृत के समान होती हैं. अगले दिन इस खीर को प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है. दरअसल, खीर को शुद्धता और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। इसे अर्पित करने से संपूर्ण परिवार में सुख-समृद्धि का संचार होता है. खीर में दूध और चावल के मिश्रण को अन्न और पोषण का प्रतीक माना गया है.
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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