Devshayani Ekadashi: आज रात 9 बजकर 59 मिनट से शुरू हो जाएगी देवशयनी एकादशी, इन दिनों भूलकर भी न करें कोई शुभ काम

आज रात 9 बजकर 59 मिनट से देवशयनी एकादशी आरंभ हो जाएगी. देवशयनी एकादशी (Devshayani Ekadashi)हिंदू कैलेंडर के अनुसार आषाढ़ मास के शुक्‍ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी कहा जाता है. बता दें, देवशयनी एकादशी 20 जुलाई को शाम 7 बजकर 17 मिनट तक समाप्त हो जाएगी. आइए जानते हैं इस एकादशी से जुड़ी जानकारी. क्या है पूजा विधि.

Devshayani Ekadashi: आज रात 9 बजकर 59 मिनट से शुरू हो जाएगी देवशयनी एकादशी, इन दिनों भूलकर भी न करें कोई शुभ काम

Devshayani Ekadashi: आज रात 9 बजकर 59 मिनट से शुरू हो जाएगी देवशयनी एकादशी, इन दिनों भूलकर भी न करें कोई शुभ काम

नई दिल्ली:

Devshayani Ekadashi 2021: हिंदू धर्म हर एकादशी का काफी महत्व होता है,  पूजा- अर्चना में ध्यान लगाने वाले लोग एकादशी जैसै पवित्र दिनों में सच्चे मन से भगवान की भक्ति करते हैं. आज रात 9 बजकर 59 मिनट से देवशयनी एकादशी आरंभ हो जाएगी. देवशयनी एकादशी (Devshayani Ekadashi)हिंदू कैलेंडर के अनुसार आषाढ़ मास के शुक्‍ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी कहा जाता है.  बता दें, देवशयनी एकादशी 20 जुलाई को शाम 7 बजकर 17 मिनट तक समाप्त हो जाएगी. आइए जानते हैं इस एकादशी से जुड़ी जानकारी. क्या है पूजा विधि.

ये है महत्व

देवशयनी एकादशी  को एक नहीं बल्कि अनेक नाम से जाना जाता है. जैसे आषाढ़ी एकादशी, पद्मा एकादशी और हरि शयनी एकादशी.

इस देवशयनी एकादशी से लेकर अगले चार महीनों तक श्री हरि विष्‍णु पाताल लोक में निवास करते हैं, जिसे भगवान की योग निद्रा कहा जाता है. इस अवधि को चातुर्मास कहा जाता है. यही वजह है कि भगवान गैर-मौजूदगी में किसी भी तरह के मांगलिक कार्यों की मनाही होती है, वहीं 4 महीने तक यानी देवप्रबोधिनी एकादशी तक कोई शुभ कार्य नहीं होता है.

ऐसे करनी होगी पूजा

सबसे पहले सुबह जल्दी उठकर नहाना होगा, जिसके बाद,  साफ- सुधरे कपड़े पहनने होंगे.  इस दिन पवित्र नदियों में स्‍नान करने का भी विशेष महत्‍व है. अगर ऐसा न कर पाएं तो गंगाजल से घर में छिड़काव करना चाहिए. फिर घर के मंदिर में भगवान विष्‍णु की मूर्ति स्‍थापित कर उसका पूजन करें. पूजा के बाद व्रत कथा सुनें. आरती कर बाद प्रसाद बांटें.

क्या है चातुर्मास कब से शुरू हैं?

पंचांग के अनुसार चातुर्मास की शुरुआत 20 जुलाई से और समाप्त 14 नवंबर को होगा. चातुर्मास यानी चार महीने. इन चार महीनों के दौरान शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते. जैसे शादी, शादी-विवाह, मुंडन, कुआं पूजन आदि कार्य.


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