Dasha Mata Vrat 2026 Date: हिन्दू पंचांग के अनुसार चैत्र नवरात्रि से पांच दिन पहले दशा माता की पूजा करने का विधान है. इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने परिवार की सुख-समृद्धि के लिए व्रत भी रखती हैं. वैदिक पंचांग के अनुसार यह व्रत हर साल चैत्र महीने के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि पर रखा जाता है. इस साल यह व्रत 13 मार्च को रखा जाएगा. धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इस दिन महिलाएं कच्चे सूत को 10 तार का डोरा बनाकर उसमें 10 गांठ लगाती हैं और पीपल के पेड़ की पूजा करते हुए इस डोरा को गले में पहनती हैं. माना जाता है, कि इससे घर की खराब दशा सही होती है और दरद्रता का नाश होता है. आइए जानते हैं व्रत के समय डोरा क्यों पहना जाता है और इसे खोलने का नियम क्या है…
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व्रत में क्यों पहना जाता है डोरा?
व्रत के दौरान डोरा पहनने का नियम होता है. इस डोरे को धागे और रेशमी डोरे से भी बनाया जा सकता है. इसके लिए आप 10 धागों को जोड़कर एक डोरा बनाएं और उसमें 10 गांठें लगा लें. अब इस डोरे को माता के सामने रखें और आशीर्वाद लेकर पूजा के बाद पहन लें. माना जाता है, कि यह डोरा जीवन में सुख-शांति और समृद्धि लाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दशा माता व्रत का समापन होने के बाद दशा माता की प्रतिमा नदी में विसर्जित करनी चाहिए.
क्या है डोरा खोलने का खास नियम?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस डोरे को कम से कम एक साल तक पहनना चाहिए. इसके अलावा आप इसे वैशाख महीने के किसी शुभ दिन में भी खोल सकते हैं.
दशा माता की कथा
दशा माता की सबसे प्रचलित कथा राजा नल और रानी दमयंती की है. एक बार राजा नल और रानी दमयंती के राज्य में सुख-शांति थी. एक दिन एक ब्राह्मणी रानी के पास दशा का डोरा, कच्चा सूत लेकर आई. रानी ने विधि-विधान से पूजा कर वह डोरा अपने गले में बांध लिया. जब राजा ने वह डोरा देखा, तो उन्होंने इसे अंधविश्वास मानकर रानी के गले से निकालकर फेंक दिया. अपमानित होकर दशा माता, जो बुढ़िया के रूप में थीं वहां से चली गईं. इसके बाद राजा की ग्रहदशा बिगड़ गई. उनका राज-पाट छिन गया, उन्हें दर-दर भटकना पड़ा और यहाँ तक कि उन्हें दूसरों के यहाँ खाना बनाना पड़ा. अंत में राजा को अपनी गलती का एहसास हुआ. उन्होंने और रानी ने मिलकर पुनः चैत्र मास में दशा माता का कठिन व्रत किया. माता प्रसन्न हुईं, राजा की दशा सुधरी और उन्हें अपना खोया हुआ राज्य और सम्मान वापस मिला. दशा माता की अनेक कथाएं ग्रामीण अंचलों में प्रचलित हैं.
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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