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This Article is From Aug 27, 2025

Chamundeshwari Temple: 1000 साल पुराने चामुंडेश्वरी महाशक्तिपीठ का आखिर क्या है रहस्य?

Chamundeshwari Mandir Mysore: देवी के जिस पावन धाम को 18 महाशक्तिपीठों में से एक माना जाता है, उस मंदिर में आखिर हर साल दशहरे के समय क्यों जुटती है आस्था की बड़ी भीड़, जानें 1000 साल पुराने चामुंडेश्वरी देवी मंदिर का पौराणिक एवं धार्मिक महत्व.

Chamundeshwari Temple: 1000 साल पुराने चामुंडेश्वरी महाशक्तिपीठ का आखिर क्या है रहस्य?
आखिर कहां है 18 महाशक्तिपीठों में से मां चामुण्डा का मंदिर?

Chamundeshwari Temple Mysore History: सनातन परंपरा में शक्ति के तमाम स्वरूपों की साधना का विधान है. मां चामुण्डा देवी शक्ति का एक ऐसा स्वरूप हैं जिनकी पूजा करने पर साधक के बड़े से बड़े कष्ट और बाधाएं शीघ्र ही दूर हो जाते हैं. हिंदू मान्यता के अनुसार सती के जहां-जहां अंग गिरे वे सभी 52 स्थान दिव्य शक्तिपीठ बन गये. इन्हीं 51 शक्तिपीठ में जिन 18 पावन शक्तिपीठ की बहुत ज्यादा मान्यता है, उनमें से एक चामुंडा देवी का भी मंदिर है. मां चामुंडेश्वरी देवी का यह पावन धाम कर्नाटक राज्य के मैसूर शहर से लगभग 13 किमी की दूरी चामुंडी पहाड़ी की चोटी पर पर स्थित है.

चामुंडेश्वरी देवी की पौराणिक कथा

पौराणिक मान्यता के अुनसार एक बार जब महिषासुर नाम के राक्षस ने जब ब्रह्मा जी से यह वरदान हासिल कर लिया कि उसकी मृत्यु सिर्फ किसी ​स्त्री के द्वारा ही हो सकती है तो वह सभी देवताओं और ऋषियों आदि पर अत्याचार करने लगा. जिसके बाद सभी देवतागण देवी दुर्गा की शरण में पहुंचे और उन्हें महिषासुर के आतंक से मुक्ति दिलाने के लिए प्रार्थना की. इसके बाद देवी दुर्गा ने अपना प्रचंड रूप यानि चामुंडा बनकर महिषासुर के साथ भीषण युद्ध किया. इस युद्ध के अंत में देवी चामुंडा ने महिषासुर का वध करके देवताओं को अभय प्रदान किया. मान्यता है कि देवी चामुण्डेश्वरी की रक्षा के लिए यहां हर समय भगवान भैरव विराजमान रहते हैं.

चामुंडेश्वरी मंदिर का धार्मिक महत्व

शक्ति के इस पावन धाम के बारे में लोकमान्यता है कि कभी इसी दिव्य स्थान पर देवी सती के बाल गिरे थे. माता के इस मंदिर को 18 महाशक्तिपीठों में से एक है. यह मंदिर 1000 साल से भी ज्यादा पुराना माना जाता है. पौराणिक काल में इस पूरे क्षेत्र को क्रौंच पुरी के नाम से जाना जाता था. यही कारण है कि स्थानीय लोग इसे क्रौंच पीठम भी कहते हैं. मंदिर परिसर की दीवारों पर की गई नक्काशी अद्भुत है. मंदिर के बाहर बैठे नंदी की भव्य प्रतिमा लोगों के आकर्षण का केंद्र बनती है.  

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मैसूर की अधिष्ठात्री देवी माने जाने वाली मां चामुंडेश्वरी की पूजा के लिए हर साल नवरात्रि पर बड़ी संख्या में भक्तगण जुटते हैं. नवरात्रि में इस पावन धाम पर न सिर्फ देवी दर्शन बल्कि दशहरा देखने वालों की भारी भीड़ जुटती है. दशहरे के दौरान इसे शक्तिपीठ की आभा देखते ही बनती है. 

मैसूर के महाराजा की कुलदेवी

देवी के इस मंदिर को बारहवीं सदी में राजा विष्णुवर्धन ने बनवाया था. मान्यता है कि मैसूर के वाडियारों के सत्ता में आने के बाद इस मंदिर की महत्ता बढ़ी. कहते हैं कि एक बार मैसूर के राजा चामराजा वाडियार मंदिर में पूजा कर रहे थे, तभी वहां पर बिजली गिरी, लेकिन वे बाल-बाल बच गये. मान्यता है कि ऐसा देवी के चमत्कार के कारण ही संभव हो पाया. देवी चामुंडेश्वरी को मैसूर के महाराजा की कुलदेवी माना जाता है.

कब होते हैं देवी के दर्शन

मंदिर की वेबसाइट के अनुसार यहां पर देवी के दर्शन सुबह 7:30 से दोपहर 2:00 बजे के बीच और दोपहर 3:30 से 6:00 बजे के बीच होते हैं. वहीं देवी का अभिषेक सुबह 6 बजे से लेकर 7:30 बजे के बीच और शाम को 6 बजे से 7:30 बजे के बीच होता है. 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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