Budh Pradosh Vrat 2026: आज यानी 15 अप्रैल को बुध प्रदोष व्रत रखा जा रहा है. इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने का विधान है. ये प्रदोष व्रत बुधवार के दिन रखा जा रहा है जिस कारण ये बुध प्रदोष व्रत कहलाएगा. धार्मिक शास्त्रों के अनुसार यह प्रदोष व्रत विशेष रूप से बुद्धि, व्यापार, शिक्षा और कार्यक्षेत्र में सफलता के लिए उत्तम माना जाता है. साथ ही जिन लोगों की कुंडली में बुध ग्रह कमजोर होता है, उनके लिए बुध प्रदोष व्रत काफी फलदायी माना जाता है. इसी कड़ी में आज हम आपको ऐसा विशेष कार्य बताने जा रहे है जिसे करने से आप भगवान शिव की कृपा और बुध ग्रह को मजबूत कर सकते हैं. आइए जानते हैं....
प्रदोष काल में करें ये आसान काम
प्रदोष व्रत की पूजा प्रदोष काल में करना बेहद फलदायी माना जाता है. पंचांग के अनुसार 15 अप्रैल को प्रदोष काल शाम 6 बजकर 56 मिनट से लेकर रात 9 बजकर 13 मिनट तक रहेगा. इस अवधि में आप शिव चालीसा और बुध चालीसा का पाठ कर सकते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिव चालीसा का पाठ करने से मन को अपार शांति, एकाग्रता और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है. साथ ही व्यक्ति के जीवन की बाधाएं दूर हो जाती हैं और सुख-शांति बनी रहती है. इसके अलावा बुध चालीसा का पाठ करने से कुंडली में बुध ग्रह मजबूत होता है, जिससे बुद्धि, तर्क क्षमता, ज्ञान और वाणी में निखार आता है. साथ ही व्यापार में लाभ, धन-समृद्धि, मानसिक शांति में भी बढ़ोतरी होती है.
यह भी पढ़ें: Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीया के दिन भूलकर भी न खरीदें ये चीजें, ज्योतिषाचार्य ने बताया सिर पर बढ़ जाएगा कर्ज, घर में आएगी दरिद्रता
यहां पढ़ें शिव चालीसा और बुध चालीसा
शिव चालीसा का पाठ
||दोहा||
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान ॥
||चौपाई||
जय गिरिजा पति दीन दयाला ।
सदा करत सन्तन प्रतिपाला ॥
भाल चन्द्रमा सोहत नीके ।
कानन कुण्डल नागफनी के ॥
अंग गौर शिर गंग बहाये ।
मुण्डमाल तन क्षार लगाए ॥
वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे ।
छवि को देखि नाग मन मोहे ॥
मैना मातु की हवे दुलारी ।
बाम अंग सोहत छवि न्यारी ॥
नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे ।
सागर मध्य कमल हैं जैसे ॥
कार्तिक श्याम और गणराऊ ।
या छवि को कहि जात न काऊ ॥
देवन जबहीं जाय पुकारा ।
तब ही दुख प्रभु आप निवारा ॥
किया उपद्रव तारक भारी ।
देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी ॥
तुरत षडानन आप पठायउ ।
लवनिमेष महँ मारि गिरायउ ॥
आप जलंधर असुर संहारा ।
सुयश तुम्हार विदित संसारा ॥
त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई ।
सबहिं कृपा कर लीन बचाई ॥
किया तपहिं भागीरथ भारी ।
पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी ॥
दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं ।
सेवक स्तुति करत सदाहीं ॥
वेद नाम महिमा तव गाई।
अकथ अनादि भेद नहिं पाई ॥
प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला ।
जरत सुरासुर भए विहाला ॥
कीन्ही दया तहं करी सहाई ।
नीलकण्ठ तब नाम कहाई ॥
पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा ।
जीत के लंक विभीषण दीन्हा ॥
सहस कमल में हो रहे धारी ।
कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी ॥
एक कमल प्रभु राखेउ जोई ।
कमल नयन पूजन चहं सोई ॥
कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर ।
भए प्रसन्न दिए इच्छित वर ॥
जय जय जय अनन्त अविनाशी ।
करत कृपा सब के घटवासी ॥
दुष्ट सकल नित मोहि सतावै ।
भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै ॥
त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो ।
येहि अवसर मोहि आन उबारो ॥
लै त्रिशूल शत्रुन को मारो ।
संकट से मोहि आन उबारो ॥
मात-पिता भ्राता सब होई ।
संकट में पूछत नहिं कोई ॥
स्वामी एक है आस तुम्हारी ।
आय हरहु मम संकट भारी ॥
धन निर्धन को देत सदा हीं ।
जो कोई जांचे सो फल पाहीं ॥
अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी ।
क्षमहु नाथ अब चूक हमारी ॥
शंकर हो संकट के नाशन ।
मंगल कारण विघ्न विनाशन ॥
योगी यति मुनि ध्यान लगावैं ।
शारद नारद शीश नवावैं ॥
नमो नमो जय नमः शिवाय ।
सुर ब्रह्मादिक पार न पाय ॥
जो यह पाठ करे मन लाई ।
ता पर होत है शम्भु सहाई ॥
ॠनियां जो कोई हो अधिकारी ।
पाठ करे सो पावन हारी ॥
पुत्र हीन कर इच्छा जोई ।
निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई ॥
पण्डित त्रयोदशी को लावे ।
ध्यान पूर्वक होम करावे ॥
त्रयोदशी व्रत करै हमेशा ।
ताके तन नहीं रहै कलेशा ॥
धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे ।
शंकर सम्मुख पाठ सुनावे ॥
जन्म जन्म के पाप नसावे ।
अन्त धाम शिवपुर में पावे ॥
कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी ।
जानि सकल दुःख हरहु हमारी ॥
||दोहा||
नित्त नेम कर प्रातः ही,पाठ करौं चालीसा ।
तुम मेरी मनोकामना,पूर्ण करो जगदीश ॥
मगसर छठि हेमन्त ॠतु,संवत चौसठ जान ।
अस्तुति चालीसा शिवहि,पूर्ण कीन कल्याण ॥
बुध चालीसा का पाठ
॥ दोहा ॥
नमो नमो जय श्री बुध राजा। करहुं कृपा मोहि जानि कायर अधम का॥
करहुं कृपा कृपानिधि बुध सदा सहाय। रोग दोष दुख हरो अनाथ के नाथ॥
॥ चौपाई ॥
जयति जयति बुध देव दयाला। सदा करत जो सुकृत प्रतिपाला॥
जटा मुकुट सिर शोभित भारी। त्रिपुण्ड चंदन रेखा प्यारी॥
गरल कनठ सर्प जग माला। नाग कंकन कर मंडित भाला॥
ब्रह्म रूप वर शुभ्र सरीरा। करत सदा जन कल्याण अधीरा॥
श्वेत कमल आसन मन भावा। संत करत सदा मंगल ध्यावा॥
कुंजल बिराजत छवि नयनी। अति मनोहर मंगल गुन खानी॥
काटत पातक पंक भरारा। बुध ग्रह दुष्ट नरक सँसारा॥
सुख सृखावत सब फल साता। रोग दोष संकट हरण विधाता॥
बुध की महिमा अपरंपारा। किया जानि मनुज दुख निवारा॥
लाख के वचन धरत दर साता। रोग हरण बुध दया विहाता॥
ग्रह अनिष्ट जो नर पर छाए। रोग दोष भय मिटै नहिं जाऐ॥
तिन्ह पर बुद्ध अनुग्रह होई। काटि दै सब संकट मोहे॥
जनम जनम के पातक भारी। काटि दै सब बुध मति तारी॥
सुर नर मुनि नित्य गुण गावे। यश गावत बुध सुख पावे॥
रोग दोष संकट सब हारी। धरहुं धीर बुध हरहु पाप भारी॥
नित नव मंगल करत सवारी। रोग दोष बुध हरहु भारी॥
अधम कायर मतिहीन हमारा। करहुं कृपा बुध हरो दुख सारा॥
सुख संपत्ति दै करहुं उपाई। जन मन रंजन मंगल लाई॥
बुध सुधी सील रूप सुहावा। संत ध्यावत मंगल भावा॥
विनय करौं बुध देव तुम्हारी। संकट हरो हे पातक भारी॥
अधम कायर सुबुद्धि सुधारा। करहुं कृपा हरो दुख सारा॥
महा संकट में तिन्हें उबारो। अधम कायर सुबुद्धि सुधारो॥
हरहुं पाप बुध महा विधाता। सुर नर मुनि सदा शुभ गाता॥
बुध की महिमा अपार पावे। अधम कायर सब संकट हरे॥
जयति जयति बुध देव सहाय। कृपा करहुं हरहुं सब भय॥
॥ दोहा ॥
नमो नमो जय बुध सुख कारी। दुख दारिद्र्य मिटाओ भारी॥
यह चालीसा बुध ग्रह का पाठ। करहुं कृपा बुध हरो सब कष्ट॥
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं